पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत पर हो सकता है तालिबानी कब्जा
इस्लामाबाद, 25 जुलाई (आईएएनएस)। आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में जारी अंतर्राष्ट्रीय युद्ध के अंधानुकरण की वजह से पाकिस्तान का पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (एनडब्ल्यूएफपी) तालिबान के हाथ जा सकता है। यह चेतावनी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ गिलानी को उनके गठबंधन सहयोगियों ने दी है।
'द न्यूज' समाचार पत्र में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एनडब्ल्यूएफपी में हालात बहुत चिंताजनक हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों ने बुधवार को अपनी बैठक में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी युद्ध का आंख बंद करके पालन करने की वजह से यह इलाका पाकिस्तान से कटता जा रहा है।
अखबार के मुताबिक गठबंधन के घटक दल जमीयत-उल-उलेमा के मौलाना फजलुर रहमान ने कहा, "मैं आपको बता रहा हूं कि एनडब्ल्यूएफपी पाकिस्तान से कटता जा रहा है।"
रहमान ने कहा कि वह यह समझ नहीं पा रहे हैं कि महज अमेरिका को खुश करने के लिए अपने देश की अखंडता को दांव पर लगाने का औचित्य है।
अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के नेतृत्व वाली एनडब्ल्यूएफपी सरकार ने भी स्वीकार किया कि स्थानीय तालिबान का राजधानी पेशावर समेत यहां के ज्यादातर हिस्सों पर असर बढ़ा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) प्रांत की सरकार की कनिष्ठ सहयोगी है।
अखबार के मुताबिक सूबे की सरकार द्वारा वहां के हालात के बारे में दिया गया बयान भी बैठक में भाग लेने वालों के लिए काफी परेशानी में डालने वाला था।
बयान में कहा गया कि स्थानीय तालिबान अब चारसाड्डा, मरदान और हांगू जिलों में परेशानी खड़ी करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
बैठक में मौजूद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज(पीएमएल-एन) ने भी आतंकवाद के खिलाफ जारी युद्ध में सरकार की नीति पर पूरी तरह निराशा जताई। पार्टी ने कहा कि उग्रवाद और आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की बहुत जरूरत है।
बैठक में कहा गया कि आतंकवाद से निपटने की राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की पिछले आठ वर्षो की नीतियों की वजह से पाकिस्तान का भविष्य दांव पर लग गया है।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि जनता का दिल जीतने के लिए राजनीतिक नेतृत्व को कुछ अहम निर्णय लेने होंगे। उग्रवाद और आतंकवाद को पाकिस्तान की आतंरिक सुरक्षा का मामला बताते हुए उसे बातचीत और प्रशासनिक कदमों से हल करने पर सहमति बनी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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