बीजिंग ओलंपिक : भारत को निशानेबाजों से पदक की आस
नई दिल्ली,25 जुलाई (आईएएनएस)। पुरुष हॉकी टीम वर्षो तक ओलंपिक में करोड़ों भारतीयों की आस ढोती रही। इस साल हॉकी टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी। उसकी गैरमौजूदगी में भारतीयों की उम्मीदें निशानेबाजों पर आ लगी हैं।
हॉकी टीम 80 वर्ष में पहली बार ओलंपिक में शिरकत करने की योग्यता नहीं हासिल कर पाई, ऐसे में भारत के नौ निशानेबाजों पर दबाव बढ़ गया है।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता था। राज्यवर्धन को छोड़कर हालांकि अन्य भारतीयों के पदक जीतने की संभावना बहुत अधिक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कुछ निशानेबाज ऐसे हैं, जिनसे उम्मीद की जा सकती है।
राज्यवर्धन के अलावा अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग, संजीव राजपूत, समरेश जंग, मानवजीत सिंह संधू, मानशेर सिंह ओलंपिक में चुनौती पेश करेंगे।
इसके अलावा महिला वर्ग में अंजलि भागवत और अवनीत कौर संधू से भी पदक की आशा की जा सकती है।
एथेंस में राज्यवर्धन स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए थे। हाल के दिनों में उनके प्रदर्शन में काफी उचार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन इसके बावजूद वह पदक की होड़ में हैं।
राज्यवर्धन के अलावा नारंग, जंग, संधू और बिंद्रा में भी भारी उलटफेर करने की क्षमता है।
भारतीय टीम की संभावनाओं को लेकर राष्ट्रीय निशानेबाजी कोच सन्नी थॉमस ने कहा, "सभी निशानेबाज जोरदार मेहनत कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि वे बहुत तेजी से नई चीजें सीख रहे हैं। राइफल निशानेबाजों ने जर्मनी में अच्छा प्रदर्शन किया है। बीजिंग जाने से पहले भारतीय टीम मलेशिया जाकर एक अभ्यास शिविर में शिरकत करेगी।"
थॉमस को भरोसा है कि राज्यवर्धन एथेंस की सफलता दोहराने में सफल रहेंगे। उन्होंने कहा, "राज्यवर्धन अभ्यास में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर वह इसी तरह निशाना लगाते रहे, तो उनका पदक जीतना तय है।"
थॉमस को इस बात का दुख है कि विश्व कप में दो रिकार्ड कायम करने के बावजूद डबल ट्रैप शूटर और दुनिया के पांचवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रंजन सोढ़ी को ओलंपिक टीम में जगह नहीं मिल सकी।
थॉमस ने आशा जताई कि उनकी टीम के लगभग सभी खिलाड़ियों में पदक जीतने की क्षमता है, बस उन्हें अपने ऊपर भरोसा रखते हुए बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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