औद्योगिक डिजाइनिंग में है रोजगार के अच्छे विकल्प

नई दिल्ली , 9 जून (आईएएनएस)। आज अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण हो चुका है। कठिन स्पर्धा के कारण उत्पाद बनाने वाली कंपनियां इस दृष्टि से बाध्य हैं कि वे प्रतियोगी कंपनियों की तुलना में सर्वोत्तम उत्पाद पेश करें। जब उद्योग समान मूल्य तथा कार्य (व्यावहारिकता) की दृष्टि से प्रतिस्पर्धा करते हैं तो ऐसी स्थिति में डिजाइन का ही अंतर पाया जाता है। अंतत: यही अंतर खास महत्व रखता है।

डिजाइन का स्पष्ट अंतर दर्शानेवाली रेखा से इस क्षेत्र में स्वर्ण युग का अभ्युदय हो चुका है, जहां लोग ग्राहक या उपभोक्ता के रूप में उत्पादों के प्रति अधिक आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं और मांग करते हैं।

हालांकि सीमित मात्रा में पूर्णत: नए उत्पाद बनाए जा सकते हैं, फिर भी औद्योगिक डिजाइनिंग का मुख्य ध्येय व्यावहारिकता व दक्षता के साथ-साथ उपभोक्ताओं की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादों के नए डिजाइन तैयार करना है। अर्थात नए पात्र में पुरानी वस्तु पेश की जाती है। यहीं पर औद्योगिक या उत्पाद डिजाइनर के विशेष कौशल सामने आते हैं। आज अधिकांश कंपनियां पूर्णत: कुशल तथा रचनात्मक शक्ति-संपन्न औद्योगिक डिजाइनर की तलाश में रहती हैं। ऑटोमोबाइल से लेकर उपभोक्ता की दृष्टि से टिकाऊ होने तक, बड़े वाहन से चिकित्सीय उपकरण एवं इंट्रमेंटेशन तक, फर्नीचर से कंप्यूटर तक उत्पादों की पूरी रेंज खोजी जा रही है। संशोधित की जा रही है तथा औद्योगिक डिजाइनर द्वारा इसे उन्नत बनाया जा रहा है।

औद्योगिक डिजाइन सर्जनात्मक शोध पर आधारित अनुप्रयुक्त विद्या है, जो उपभोक्ता की दृष्टि से टिकाऊ एवं व्यापक स्तर पर उत्पादों या व्यावसायिक और औद्योगिक प्रयोग के लिए उपकरण तैयार करने के कार्य से जुड़ी है। आप इसे सर्जनात्मक इंजीनियरिंग कह सकते हैं। डिजाइनर कला से संबंधित हुनर या कौशल इस्तेमाल करता है, ताकि इस प्रकार से आकर्षक व लुभानेवाले उत्पादों को बढ़ावा मिले कि इनसे मात्र प्रयोजनों की पूर्ति ही न हो बल्कि ये देखने में भी अच्छे लगें। आराम, सौंदर्य-बोध, दक्षता, सुरक्षा, विश्वसनीयता तथा किफायत की दृष्टि से उपभोक्ता की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखना है। ये सभी मुद्दे उत्पाद की बिक्री से संबंधित हैं। इनकी वजह से अधिकांश विनिर्माण संबंधी उद्योगों में डिजाइन डिवीजन बनाना जरूरी हो गया है।

औद्योगिक डिजाइनर कलात्मक प्रतिभा के साथ उत्पाद के प्रयोग, उत्पादन विधियों तथा सामग्री के संबंध में अनुसंधान कार्य का सुंदर मेल करता है। इस संगम से बाजार में प्रतियोगी उत्पाद बनाने के लिए व्यवहारमूलक एवं आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। औद्योगिक डिजाइनर के लिए प्रमुख चुनौती उत्पाद की कीमत घटाना है।

औद्योगिक डिजाइनर सबसे पहले उत्पाद का लॉजिस्टिक निर्धारित करता है। वह आवश्यक सामग्री की सूची बनाता है, विनिर्माण का स्थल तथा तरीका तय करता है, जिससे सुरक्षित तथा प्रयोग की दृष्टि से सुविधाजनक उत्पाद तैयार किया जा सके। इसके पश्चात उत्पाद के रूप की योजना तैयार की जाती है। आरेख और मॉडल बनाए जाते हैं। अंतत: कार्यकारी मॉडल तैयार किया जाता है। औद्योगिक डिजाइनर की प्रमुख अपेक्षाएं सर्जनात्मकता, सौंदर्य-बोध तथा कल्पना-शक्ति है।

उसे तार्किक ढंग से सोचने के योग्य होना चाहिए। समस्याओं का विश्लेषण करना चाहिए तथा मौलिक सुझाव देने की क्षमता होनी चाहिए। आरेखों के माध्यम से विचार अभिव्यक्त करने, कल्पना करने और तीन आयामों में सोचने का सामथ्र्य औद्योगिक डिजाइनर की निर्णायक योग्यता है। उसमें यह जानने की जिज्ञासा होनी चाहिए कि छोटी-मोटी मशीनें तथा वस्तुएं किस प्रकार कार्य करती हैं। यांत्रिकी में रुचि होना जरूरी है। साथ ही थोड़ी-बहुत गणितीय योग्यता भी होनी चाहिए। डिजाइनर को जटिल एवं विस्तृत कार्य करने में सक्षम होना चाहिए। उदाहरणतया, आरेखन एवं संरचनात्मक मॉडल।

भारत में औद्योगिक डिजाइनिंग अपेक्षाकृत नया कार्यक्षेत्र है। यहां प्रशिक्षण सुविधाएं भी कम हैं। दिल्ली और मुंबई में स्थित आईआईटी, भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद तथा मौलाना आजाद प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, भोपाल जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। आईआईटी, मुंबई और दिल्ली में औद्योगिक डिजाइन में दो वर्ष का मास्टर प्रोग्राम चलाया जाता है। इसमें चार सत्र (समेस्टर) होते हैं। इस पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम योग्यता इंजीनियरिंग या वास्तुशिल्प में स्नातक डिग्री है।

आईआईटी, मुंबई द्वारा अखिल भारतीय आधार पर फरवरी में आईआईटी तथा आईआईएस की डिजाइन क्षेत्र से संबंधित सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईईडी) ली जाती है। दोनों संस्थानों के लिए क्रमश: अभिवृत्ति परीक्षा तथा साक्षात्कार लिये जाते हैं।

आईआईटी, मुंबई तथा आईआईटी, बंगलौर में पंद्रह-पंद्रह छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। जबकि आईआईटी, दिल्ली में प्रतिवर्ष बीस छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। आईआईटी प्रमुख उद्योगों से परामर्श कार्य भी लेती है, ताकि छात्र प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। इस पाठ्यक्रम की फीस लगभग दस हजार रुपए प्रति सत्र है।

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद औद्योगिक डिजाइन में पांच वर्ष का स्कूल लीवर्स व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम चलाता है। यह कार्यक्रम कला की ओर अभिमुख है, जहां उत्पाद डिजाइन, टैक्सटाइल डिजाइन, फर्नीचर डिजाइन और चीनी मिट्टी की वस्तुओं के डिजाइन में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। एनआईडी इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए उत्पाद डिजाइन में डेढ़ वर्ष का डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाता है। एक्सटीरियर्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली इंटीरियर डिजाइन में फर्नीचर में विशेषज्ञता सहित एक वर्ष का डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाता है।

भारत में औद्योगिक डिजाइनर की मांग है जबकि अभी यह प्रोफेशन अभ्युदय काल में है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार भारत में अभी प्रति दस लाख दो से भी कम औद्योगिक डिजाइनर हैं जबकि इस क्षेत्र में पचास गुना वृद्धि की गुंजाइश है।

औद्योगिक डिजाइनर परामर्श क्षेत्र में भी उद्यम खोल सकते हैं। स्वतंत्र औद्योगिक डिजाइनर के रूप में काफी आकर्षक विकल्प मौजूद हैं। डिजाइनर के रूप में ये बिक्री-डिजाइन सेवा तथा संविदा प्राप्त करने से लेकर डिजाइन, विकास और परिणामों के परीक्षण तक सभी अवस्थाओं के लिए जिम्मेदार हैं। ये डिजाइनर उत्पाद-नियोजक के रूप में कार्य करते हैं तथा बाद में कंपनी के विकास और उत्पादन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता करते हैं। अन्य विकल्प शिक्षण कार्य है। प्रारंभिक वेतन दस हजार रुपये तथा इससे अधिक मिलता है।

अधिकाधिक कंपनियां डिजाइन के प्रति सजग हो रही हैं। औद्योगिक डिजाइनर की ऑटोमोबाइल क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ग्राहकों के लिए टिकाऊ सामान, पैकेडिंग फर्नीचर आदि की दृष्टि से अग्रणी कंपनियों द्वारा भर्ती की जा रही है। नए योग्य डिजाइनर को डिजाइन टीम के जूनियर सदस्यों के रूप में कार्य सौंपे जाते हैं। उन्हें विनिर्माण कंपनियां या डिजाइन परामर्श कंपनियां काम पर रखती हैं। प्रारंभ में इस कार्यक्षेत्र में नियमित कार्य ही शामिल होते हैं तथा अन्य लोगों के लिए डिजाइन तैयार किए जाते हैं। ये डिजाइनर धीरे-धीरे उच्चतर प्रबंधन स्तर की ओर बढ़ते हैं। फिलिप, गोदरेज, टाइटन, टेल्को वीडियोकॉन जैसी औद्योगिक फर्मे व्यावसायिक औद्योगिक डिजाइनर रखती हैं।

भारतीय उत्पाद डिजाइन अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में भी स्थान प्राप्त कर रहे हैं। इसलिए डिजाइनर का इस क्षेत्र में उज्जवल भविष्य है।

(कैरियर संबंधी और अधिक जानकारी के लिए देखिए ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें")

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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