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आहार विशेषज्ञता भी दिलाती है रोजगार के अवसर

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    नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। आजकल तनाव के कारण होने वाले रोग बढ़ रहे हैं। इसलिए इस डॉट कॉम के युग में स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से महत्व दिया जा रहा है। जैसे-जैसे लोग यह महसूस कर रहे हैं कि गरिष्ठ आहार और सॉल्यूशन कभी समाप्त नहीं होते वैसे-वैसे संतुलित आहार भी प्रचलन में आता जा रहा है।

    पौष्टिक आहार का विज्ञान अनिवार्यत: लोगों के खान-पान की आदतों एवं स्थितियों के संबंध में अनेक बाह्य और आंतरिक घटकों को ध्यान में रखते हुए सही चयन में सहायता करने से संबंधित है। अत: जैव-रसायन प्रकिया, शरीर-विज्ञान संबंधी प्रक्रिया एवं भोजन व मानव शरीर की विस्तृत जानकारी होना आवश्यक है। आहार विशेषज्ञ अनिवार्यत: शरीर और भोजन के बीच संबंधों की जानकारी लेता है, चूंकि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में अद्भुत है, इसलिए आहार विशेषज्ञ को पहले व्यक्ति के खान-पान की आदतों पर प्रभाव डालने वाले विभिन्न घटकों की पहचान करनी होती है।

    आम धारणा के प्रतिकूल आहार विशेषज्ञ बीमार लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केवल अस्पतालों में काम पर रखे जाते हैं। यह कार्य आहार विशेषज्ञ का प्रमुख कार्य है लेकिन बढ़ती आबादी, तनाव एवं दूषित जीवन-शैलियों के दुष्प्रभाव से स्पष्ट होते जा रहे हैं कि अब लोग ऐसे व्यावसायिकों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें उचित पौष्टिक आहार की जानकारी दे सके। परंतु अभी तक भारत में यह व्यवसाय अपेक्षाकृत कम जाना-पहचाना है।

    पौष्टिक आहार का क्षेत्र व्यापक है। इसमें व्यक्ति प्रैक्टिस के अलावा शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में पैर जमा सकता है। ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें" के अनुसार आहार विशेषज्ञ इस व्यापक क्षेत्र में से मनपसंद विकल्प चुन सकता है। ये अनिवार्यत: रोगियों (यदि अस्पताल या पोलिक्लीनिक में है) तथा ग्राहकों (क्लाइंट) का विस्तृत रूप से अध्ययन करते हैं। इसके साथ-साथ रोगियों के व्यवसाय, रुचियों व अरुचियों, बाल्यावस्था के समय पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, परिवेश में विद्यमान तनाव, वित्तीय स्थिति आदि जैसे घटकों पर विचार करने के बाद आहार-सूचियां तैयार करते हैं। इन सूचियों में रोगी के लिए सर्वाधिक उपयुक्त खाद्य पदार्थो की सूची भी शामिल रहती है। प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ की कार्य संबंधी प्रोफाइल में रोगी या ग्राहक (क्लाइंट) को खान-पान संबंधी अच्छी तथा बुरी आदतों के बारे में परामर्श देना भी शामिल है।

    यद्यपि पोषण या आहार उपचार की बजाय निवारण-विज्ञान है लेकिन तनाव दूर करने में यह विज्ञान काफी सहायक होता है। विशेष रूप में ऐसे रोगियों के मामले में सहायक होता है जो हृदय रोग से ग्रस्त होते हैं। देशभर में जगह-जगह खुले हुए हेल्थक्लब, मोटापा दूर करने वाले क्लीनिक तथा स्पास भी उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है जो आहार विशेषज्ञ के रूप में प्रैक्टिस करना चाहते हैं। अनुसंधान कार्य अन्य विकल्प हैं। आज पूरे विश्व में भोजन संबंधी विषय सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो रहे हैं। विशेषत: आनुवंशिकी रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ पर अधिक बल दिया जा रहा है। अत: पोषण या आहार क्षेत्र में अनुसंधान से जुड़े कार्यो की कोई कमी नहीं है।

    तथापि भारत में यह क्षेत्र अभी नया है। इस विषय में पश्चिमी देशों द्वारा आयोजित अनुसंधान पर ही निर्भर रहना पड़ता है। अनुसंधानकर्ता के कार्यो में अनुसंधान कार्य के अलावा विभिन्न विकारों या रोगों तथा स्वस्थ लोगों के लिए पौष्टिक आहार के बारे में समुदाय को शिक्षित करने के लिए शैक्षिक सामग्री तैयार करना भी शामिल हो सकता है। आईसीडीसी (समेकित बाल विकास सेवा) जैसे सरकारी कार्यक्रमों में आहार विशेषज्ञ की सेवाएं ली जाती हैं ताकि लोगों को प्रशिक्षित किया जा सके तथा अनुसंधान कार्य किए जा सकें।

    संयुक्त राष्ट्र, यूनिसेफ तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भी अनुसंधान परियोजनाओं के लिए आहार विशेषज्ञ को रखा जाता है। आप सरकारी, गैर सरकारी या विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं में कार्य कर सकते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आनेवाले नेस्ले जैसे खाद्य उद्योग तथा एनआईएन (राष्ट्रीय पोषण संस्थान) जैसी अनुसंधान संस्थाओं में भी ऐसे व्यावसायिक रखे जाते हैं। समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सामुदायिक कार्यशालाओं का आयोजन तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन, स्कूलों तथा गृह विज्ञान महाविद्यालयों में शिक्षण जैसे अन्य क्षेत्रों में भी आहार विशेषज्ञों के लिए नई-नई संभावनाएं मौजूद हैं। होटल और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी इच्छुक आहार विशेषज्ञ के लिए आकर्षक नौकरियां हैं। परामर्श, फास्ट फूड उद्यम तथा पार्टी केटरिंग सेवाएं अन्य क्षेत्र हैं।

    आहार विशेषज्ञ को आरंभ में पांच हजार से दस हजार रुपये तक प्रति माह वेतन मिलता है लेकिन प्रतिष्ठित विशेषज्ञ इससे भी अधिक कमा सकते हैं। सरकारी अस्पताल में आरंभ में लगभग दस हजार रुपये प्रतिमास वेतन मिलते हैं। निजी अस्पतालों में पंद्रह हजार रुपये तक वेतन दिए जाते हैं। गैर सरकारी परामर्शदाता प्राय: पहली सिटिंग और आहार प्लान के पांच सौ रुपये लेते हैं। इसके बाद प्रत्येक सीटिंग के लिए लगभग दो सौ से तीन सौ रुपये प्रति माह तक फीस लेते है। जिन लोगों के पास वर्षो का कार्य अनुभव है वह आसानी से पच्चीस हजार रुपये प्रति माह कमा सकते हैं।

    आहार विशेषज्ञ के कार्य की चुनौती नुस्खा लिखने से ज्यादा नए ढंग से सोचकर रोगियों और क्लाइंटों के लिए आकर्षक भोजन तालिका तैयार करना है। बीएस.सी या पोषण व आहार विज्ञान में डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी तत्काल इस दिशा में रोजगार खोज सकता है और अपना कैरियर बना सकता है।

    यहां संप्रेषण कौशल होना अनिवार्य गुण है। व्यक्ति के पास तथ्यों, आंकड़ों और निष्कर्षो की अद्यतन जानकारी होनी चाहिए। जब व्यक्ति योग्यता प्राप्त आहार विशेषज्ञ बन जाता है तब नौकरी ढूंढ़ना कठिन नहीं होता है लेकिन यदि आप प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो प्रारंभ में आपके लिए यह कार्य थोड़ा कठिन होता है।

    (कैरियर संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए देखिए ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें" )

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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