गर्मी की छुट्टियों के सदुपयोग का बेहतर माध्यम हैं अंशकालीन नौकरियां
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। स्कूली परीक्षाएं समाप्त हो जाने पर कुछ छात्र नई किताबें और कॉपियां खरीदने लगते हैं। उन पर खाकी कागजात का कवर चढ़ाया जाता है, फिर उन्हें सजाया जाता है, सुंदर-सुंदर अक्षरों में अपना नाम, नई कक्षा लिखी जाती है। लेकिन कुछ छात्र बड़े धर्य से परिणामों की प्रतीक्षा करते रहते हैं। परीक्षा के बाद छात्र-जीवन में नया दौर-कॉलेज जीवन- शुरू होने वाला होता है। व्यक्तिगत हालात पर निर्भर करते हुए किसी का यह समय आराम से बीतता है, जबकि कुछ छात्रों के लिए यह समय काटना भारी पड़ता है।
ग्रीष्मकालीन नौकरियों या अंशकालीन नौकरियों की संकल्पना भारत में पहले से ही आवश्यक समझी जा रही है। लेकिन बेबी-सीटिंग या अपना पेपर रूट तैयार करना अभी भी भारत में हॉलीवुड मूवी के समान समझा जाता है और अभी तक यह वास्तविक रूप नहीं ले पाया है। लेकिन इस समय को अन्य उपयोगी तरीकों से भी बिताया जा सकता है।
यदि आप व्यंजनों के शौकीन हैं और आपको लोगों से मिलना-जुलना पसंद है तथा आप पैसा संभाल सकते हैं, घंटों खड़े रह सकते हैं और तब भी आप खुश मिजाज रहते हैं तो फास्ट फूड के काउंटर के पीछे की सीट आपको मनपसंद स्थान होगा। मैकडॉनेल्ड जैसे संस्थान में घंटे के आधार पर अंशकालीन रूप से कार्य करने वालों को भुगतान किया जाता है। शुरू-शुरू में तेरह रूपये प्रति घंटे के हिसाब से धनराशि दी जाती है। यह राशि अठारह रूपये प्रति घंटे तक बढ़ाई जा सकती है। यदि आप दो पहिया स्कूटर चला सकते हैं तो आप घर-घर जाकर ऑर्डर की डिलीवरी देकर पूरे शहर का आनंद उठा सकते हैं।
यदि आपको चीजें बेचना अच्छा लगता है, किसी ऐसे हठी ग्राहक के साथ हंसकर पेश आते हैं, जो स्थल पर हर वस्तु का इस्तेमाल करके देखना चाहता है तो विभिन्न स्टोर्स के सेल्स काउंटर पर कार्य करना अच्छा रहेगा। इसके अलावा प्रदर्शनियां भी अच्छा विकल्प हैं। हालांकि अस्थायी रूप से ही यहां कार्य मिलता है, फिर भी इन प्रदर्शनियों में काम करके अच्छी आमदनी हो जाती है। यह धनराशि काम करने वाली कंपनी पर निर्भर करती है। इसके अलावा प्लेसमेंट एजेंसियां भी ऐसे मेलों तथा प्रदर्शनियों के लिए कंपनी की ओर से छात्र उपलब्ध कराती हैं। अधिकांश ऐसे कंपनियां कॉलेजों में विज्ञापन देती हैं।
इच्छुक छात्र-छात्राओं को फॉर्म भरना होता है, इसमें उन्हें अपनी योग्यता तथा अन्य विशेषताओं का संक्षिप्त ब्योरा देना होता है। कुछ एजेंसियां फोटोग्राफ भी लेती हैं। ये एजेंसियां तमाम प्रविष्टियों का रिकॉर्ड रखती हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर संपर्क करती हैं।
प्रबंधन कंपनियों में भी कुछ लोग कार्य करते हैं। उत्पाद को लांच करने के लिए डेस्ट पंजीकरण तथा उत्पादों के संवर्धन, कॉरपोरेट सूचना एवं शिक्षाप्रद कार्यक्रमों, कॉन्सेप्ट शो आदि में शामिल 99 प्रतिशत लोग छात्र-छात्राएं होते हैं। इन्हें दो सौ से पांच सौ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। चुने गए उम्मीदवार अच्छे वक्ता होने चाहिए तथा कार्य के प्रति निष्ठावान हों, क्योंकि इनका संगठन की छवि पर असर पड़ता है। संवर्धन कंपनियों तथा मेलों में सर्वाधिक भुगतान किया जाता है। एक दिन के कार्य के लिए चार सौ से लेकर एक हजार रुपये तक भुगतान किया जाता है। यह ग्राहक की क्षमता पर निर्भर करता है।
इंटरनेट के बफ एवं सर्फर के लिए वेबसाइट रोचक विकल्प है। पोर्टल जैसी साइट विषय-वस्तु तैयार करने तथा कहानी लेखन के लिए विद्यार्थियों को काम कर रखती है। इन्हें ढाई हजार से लेकर चार हजार रुपये तक पारिश्रमिक दिया जाता है। युवकों के पास नए-नए विचार होते हैं। वे सर्जनात्मक तथा उत्साही होते हैं। इसलिए अधिकांश वेबसाइटें छात्र-छात्राओं को ही काम करने का मौका देती हैं। हालांकि कंपनी को अनुभवी लोगों की जरूरत होती है, लेकिन अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए युवावर्ग को भी जरूरत रहती है।
अन्य रोचक कार्य सर्वेक्षण का है। इस क्षेत्र में काफी संख्या में लोगों की जरूरत रहती है। यहां शहर में घूम-घूूमकर लोगोंे से मिलना होता है तथा नए विचारों को जाना जाता है। इस कार्य में अच्छा पारिश्रमिक मिलता है।
यदि आप चौबीस घंटे टेलीफोन से चिपके रहते हैं, तो टेली-मार्केटिंग (घर में बैठे टेलीफोन आदि से शॉपिंग) डाइनिंग क्लब जैसी कंपनियां तीन हजार रुपए प्रति माह वेतन तथा प्रतिदिन चार घंटे कार्य करने जैसे अन्य प्रोत्साहन देती हैं। साथ ही सप्ताह में छह दिन कार्य करना पड़ता है।
इन नौकरियों का आकर्षक पहलू यह है कि ये सभी पूर्णत: अस्थायी होती हैं। कुछ दिन कार्य करके आपको जेब में अतिरिक्त पैसा आ जाता है। चाहे आप दिन में कुछ घंटे की कार्य क्यों न करें।
अकादमिक (शैक्षणिक) योग्यता मानदंड नहीं है। योग्यता मानदंड नहीं है। आपके पास संप्रेषण या अभिव्यक्ति की योग्यता होनी चाहिए, कुछ मामलों में सौम्य व्यक्तित्व होना चाहिए। इन नौकरियों से आत्मविश्वास ही उत्पन्न नहीं होता, बल्कि इनके माध्यम से आप हर क्षेत्र के लोगों के संपर्क से आते हैं। ग्रीष्मकालीन या अंशकालीन नौकरी से आप काफी कुछ नया सीखते हैं। आपको किसी विशेषता का पता चलता है और जीवन के प्रति नया दृष्टिकोण बनता है। साथ ही व्यक्ति अतिरिक्त जेब खर्च कमाता है।
अंशकालीन नौकरियां या कार्य व्यक्ति को भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। आप चाहे जो भी कार्य करें, हमेशा याद रखें कि सभी कार्य श्रमसाध्य होते हैं तथा कुछ सीमा तक मन भी उकता जाता है। कभी-कभी कुंठा भी उत्पन्न होती है। युवा व्यक्ति में अत्यधिक आत्मविश्वास नहीं होना चाहिए। याद रखें कि कुछ कंपनियां इसी कारण से युवकों को काम पर रखती हैं, क्योंकि उन्हें स्थायी रूप से कर्मचारी नहीं रखने पड़ते।
व्यक्ति की अंतरंग विशेषता के आधार पर ये नौकरियां नहीं दी जातीं। यह भी याद रखें कि अस्थायी कर्मचारी का अर्थ है कि आपको ऐसा कार्य दिया जा रहा है, जो कंपनी में और कोई नहीं करना चाहता। स्पष्ट शब्दों में, आप कंपनी पर अपनी शर्ते नहीं लाद सकते, कार्य करने के लिए आपके पास धर्य, परिश्रम, रुचि, समझ-बूझ, ऑर्डर लेने की क्षमता होना जरूरी है।
(यह लेख ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए गांगुली और एस भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें" से लिया गया है।)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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