सारनाथ में दक्षिण एशियाई पर्यटकों के शुल्क में 95 प्रतिशत कमी
वाराणसी, 26 मई (आईएएनएस)। सारनाथ सहित देश के तमाम पुरातत्व स्थलों को देखने आने वाले दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों के लिए पुरातत्व विभाग ने शुल्क में भारी कमी करने की घोषणा की है।
अब तक दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों से पुरावशेष देखने का शुल्क 100 रुपये और भारतीय पर्यटकों से 5 रुपये शुल्क लिया जाता था लेकिन अब दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों से भी उतना ही लिया जाएगा जितना भारतीय पर्यटकों से लिया जाएगा।
रविवार को घोषित नई शुल्क दर में दक्षणि एशियाई देशों के पर्यटकों से भी 5 रुपये ही लिया जाएगा, लेकिन अभी भी यूरोपीय और पश्चिमी देशों के पर्यटकों को पहले की तरह 1000 रुपये ही देना पड़ेगा। शुल्क में कमी का निर्णय पिछले दिनों हुई बैठक में लिया गया था।
सारनाथ पुरातत्व विभाग के एक कर्मचारी अजय गुप्ता ने बताया कि दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों में भारतीय पुरावशेष के प्रति खास आकर्षण देखा जाता है इसलिए इनके द्वारा दिए गए शुल्कों में कमी करना बेहद जरूरी था। शुल्क में 15 प्रतिशत तक की कमी करने का निर्णय आज यहां सार्वजनिक किया गया है।
सारनाथ को बौद्ध धर्म की जन्म स्थली कहा जाता है इसिलए यहां पूरी दुनिया से बौद्ध तीर्थ यात्री आते हैं। यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों में मुख्य रूप से म्यांमार, श्रीलंका, वर्मा, थाईलैंड, मालदीव, बांग्लादेश और मॉरीशस के पर्यटक बड़ी संख्या में घूमने आते हैं जो शुल्क काफी होने से पुरातात्विक स्थलों को देख नहीं पाते थे।
शुल्क में कमी के बाबत महाबोधि सोसाइटी के संयुक्त सचिव सुमेध थेरो ने कहा कि शुल्क में कमी की मांग हम लोग पुरातत्व विभाग से लंबे समय से कर रहे थे। जिसे सरकार ने अब माना है। वर्मा बौद्ध मंदिर के विहाराध्यक्ष यू गणध्वाज और तिब्बती संस्थान के एलन शास्त्री ने कहा कि शुल्क में कमी से दक्षिण एशियाई देशों के लोगों का सारनाथ के प्रति झुकाव बढ़ेगा और उम्मीद है कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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