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पाकिस्तानी बेटे की मौत के बाद मुआवजे के लिए भटक रही भारतीय मां

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    नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। एक वर्ष पहले समझौता एक्सप्रेस बम धमाके में बड़े बेटे, बहु और चार पोते-पोतियों को खो चुकी 70 वर्षीय मैमूना खातून का परिवार मुआवजे के इंतजार में दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक गया है।

    नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। एक वर्ष पहले समझौता एक्सप्रेस बम धमाके में बड़े बेटे, बहु और चार पोते-पोतियों को खो चुकी 70 वर्षीय मैमूना खातून का परिवार मुआवजे के इंतजार में दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक गया है।

    बिहार के गया जिले की रहने वाली मैमूना ने आतंकवादी धमाके में अपने बड़े पुत्र शब्बीर समेत छह परिजनों को खो दिया था। शब्बीर एक पाकिस्तानी नागरिक था और छुट्टी मनाने भारत आया था। मैमूना का छोटा बेटा मोहम्मद जावेद भारत में रहता है।

    घटना के बाद जावेद लगातार विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है लेकिन सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिल पाई है।

    जावेद ने मायूसी के साथ कहा, "सरकारी अधिकारी मुआवजा दिए जाने से इंकार कभी नहीं करते हैं लेकिन हमेशा एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर का चक्कर लगवाते रहते हैं।"

    उसने कहा, "हम लोग बेहद गरीब हैं। ऐसी स्थिति में कैसे अधिकारियों से बातचीत करने के लिए कभी दिल्ली तो कभी पानीपत का चक्कर लगा सकते हैं?"

    उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 12 फरवरी की रात हरियाणा में पानीपत के करीब समझौता एक्सप्रसे में विस्फोट हुआ था, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी।

    जावेद ने कहा, "दुर्घटना के बाद हम लोगों ने रेलगाड़ी से सफर कर रहे छह परिजनों में से चार की पहचान की थी। इसके बाद सरकार ने बतौर मुआवजा 10 लाख रुपये देने का वादा किया था लेकिन अब तक यह राशि नहीं मिल पायी है।"

    उसने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मुआवजे के लिए कभी पानीपत, कभी दिल्ली स्थित रेलवे कार्यालय तो कभी पाकिस्तानी उच्चायोग का चक्कर लगाना पड़ रहा है।"

    जावेद ने बताया कि हरियाणा पुलिस उसके भाई और अन्य चार परिजनों की मौत का प्रमाण पत्र दे चुकी है। इसके बाद चार लाख रुपये भी दिए गए थे और मुआवजे की बची राशि को तत्काल देने का वादा किया गया था।

    जावेद ने विदेश मंत्रालय में पाकिस्तानी विभाग के उप सचिव जी. बालासुब्रमण्यम से भी बात की है लेकिन उसका भी कोई खास असर नहीं दिख रहा है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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