गठबंधन सरकार ने मुशर्रफ पर इस्तीफे का दबाव बनाया (लीड)
इस्लामाबाद, 26 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में गठबंधन सरकार और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच एक अधिकारिक सूत्र ने सोमवार को कहा कि मुशर्रफ अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
इस्लामाबाद, 26 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में गठबंधन सरकार और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच एक अधिकारिक सूत्र ने सोमवार को कहा कि मुशर्रफ अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
अधिकारिक सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि राष्ट्रपति के सामने काफी कठिन समय है और उनके पास इस्तीफा देने के आलावा और कोई चारा नहीं है। यदि वह इस्तीफा नहीं देंगे तो उनको महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है।
गठबंधन सरकार चाहती है कि मुशर्रफ इस्तीफा दे दें, क्योंकि अमेरिका नहीं चाहता कि उन पर महाभियोग चले।
अमेरिका ने इसके लिए प्रयास तेज कर दिया है कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सहअध्यक्ष आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ मिलकर बेहतर कार्यात्मक संबंध विकसित करें।
जरदारी द्वारा एक साक्षात्कार में मुशर्रफ को 'बीते हुए समय का प्रतीक' बताने के तुरंत बाद बुश प्रशासन ने इस दिशा में प्रयास तेज किया है।
सोमवार को प्राप्त समाचारों के अनुसार जरदारी ने कहा है कि उनके कई शुभचिंतकों ने सलाह दी है कि वह व्यक्तिगत रूप से मुशर्रफ से मिलकर राजनीतिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करें और उनका हल निकालें।
समाचारों के अनुसार ये शुभचिंतक और कोई नहीं बल्कि अमेरिका के दो सीनेटर कार्ल लेविन और बॉब केसी हैं, जो अभी हाल में पाकिस्तान के दौरे पर आए थे।
अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पीपीपी मुशर्रफ पर महाभियोग लगाकर अपमानित नहीं करे जैसा कि जरदारी ने धमकी दी थी।
जरदारी ने इसके पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ के साथ मिलकर काम करने के लिए गठबंधन के सहयोगी दल पाकिस्तान मुस्लिीम लीग-नवाज के साथ तय मुद्दों पर भी अपने कदम पीछे हटा लिए थे। इस कारण राजनैतिक हलकों में उनको आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
जरदारी ने इन आलोचनाओं से बचने के लिए बुश प्रशासन से आग्रह किया है कि वह विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे की अगले हफ्ते प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा टाल दे।
गौरतलब है कि नेग्रोपॉन्टे ने मार्च में भी अमेरिका का दौरा किया था। जरदारी को आशंका है कि उनके बार बार के दौरों से जनता में यह नकारात्मक संदेश जाएगा कि अमेरिका पाकिस्तान के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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