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पंद्रह सालों की गैरहाजिरी के बाद नौकरी के साथ आधा वेतन मिला

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    नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। पंद्रह साल तक नौकरी से गैरहाजिर रहने के बाद भी अदालत ने एक व्यक्ति को नौकरी पर वापस लेने और इस दौरान का आधा वेतन देने का आदेश दिया है।

    नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। पंद्रह साल तक नौकरी से गैरहाजिर रहने के बाद भी अदालत ने एक व्यक्ति को नौकरी पर वापस लेने और इस दौरान का आधा वेतन देने का आदेश दिया है।

    पश्चिम बंगाल निवासी एस.एन दास के मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय ने भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) में सहायक इंजीनियर के पद पर नियुक्त दास को 15 साल की अनुपस्थिति के बाद भी नौकरी पर वापस लेने और इस दौरान की आधी तनख्वाह देने का आदेश दिया था।

    सरकार द्वारा संचालित एएआई ने दास को नौकरी पर वापस तो रख लिया लेकिन 15 साल के आधे वेतन के भुगतान के मामले में उसने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए एएआई को दास का वेतन देने का आदेश दिया है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय की घोषणा 16 मई को कर दी थी, लेकिन उसे पिछले हफ्ते जारी किया गया।

    दास एएआई कोलकाता में सहायक इंजीनियर के पद पर नियुक्त थे। उनका तबादला मार्च 1985 में दिल्ली कर दिया गया। उनको 19 मार्च 1985 में दिल्ली नियुक्ति पर पहुंचना था। लेकिन अपनी दादी की बीमारी की वजह से दास समय पर दिल्ली नहीं पहुंच सके।

    दास ने बीमारी के आधार पर अपनी छुट्टी बढ़ाने का आवेदन दिया, लेकिन उनको कोलकाता मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर परीक्षण कराने को कहा गया।

    मेडिकल बोर्ड ने उनको स्वस्थ करार दिया। दास को नौकरी पर दिल्ली नहीं पहुंचने पर बर्खास्तगी की धमकी दी गई।

    दास ने इसके खिलाफ 1986 में कोलकाता उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया। उच्च न्यायालय ने 10 साल बाद 10 नवंबर 1995 को अपने निर्णय में एएआई से दास को बिना आधा वेतन दिए नौकरी पर वापस लेने का आदेश दिया था।

    फैसले से असंतुष्ट दास ने कोलकाता उच्च न्यायालय की डबल बेंच में इसको चुनौती दी। डबल बेंच ने 1999 में दास को आधे वेतन के साथ नौकरी पर वापस लेने का आदेश दिया।

    लेकिन एएआई ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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