लखनऊ सीट पर कौन उठाएगा भाजपा का झंडा

लखनऊ , 26 मई (आईएएनएस)। भाजपा के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने की स्थिति में उनके संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने को लेकर भाजपा में चल रही खेमेबंदी के बारे में वाजपेयी के निकटस्थ लालजी टंडन का कहना है कि यह तो वैसी ही स्थिति है कि सूत न कपास और जुलाहे में लट्ठम लट्ठा।

लखनऊ , 26 मई (आईएएनएस)। भाजपा के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने की स्थिति में उनके संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने को लेकर भाजपा में चल रही खेमेबंदी के बारे में वाजपेयी के निकटस्थ लालजी टंडन का कहना है कि यह तो वैसी ही स्थिति है कि सूत न कपास और जुलाहे में लट्ठम लट्ठा।

लालजी टंडन को भी लखनऊ लोकसभा सीट के लिए संभावित उम्मादवारों में माना जाता है। वह 1991 से वाजपेयी के चुनाव का सारा प्रबंधन संभालते आए हैं। इस बारे में पूछे जाने पर टंडन ने आईएएनएस से पलट कर सवाल किया कि क्या स्वयं वाजपेयी ने कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे।

इस सवाल पर कि स्वयं वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से किनारा करने की बात तो अवश्य कही है लालजी टंडन ने कहा कि सक्रिय राजनीति से हटने की बात और चुनाव न लड़ना एक ही बात नहीं है। सक्रिय राजनीति से अलग होने की बात वाजपेयी ने स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण कही थी और इसीलिए लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया गया है।

लालजी टंडन ने कहा कि अटल जी भारत ही नहीं पूरी दुनिया की धरोहर हैं। इस समय दुनिया में उनके कद का कोई नेता नहीं है और संसद में उनकी मौजूदगी स्वयं संसद की गरिमा को बढ़ाती है। सभी संसद में उनकी मौजूदगी चाहते हैं। खुशी की बात है कि अब उनकी सेहत में लगातार सुधार भी हो रहा है।

लालजी टंडन का कथन अपनी जगह है लेकिन फिलहाल जैसी लाबिंग हो रही है उसको देखते हुए यही कहा जा सकता है पार्टी का एक बड़ा वर्ग यही मानकर चल रहा है कि वाजपेयी अब नहीं लड़ेंगे। हाल ही में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और फिलवक्त बिहार के प्रभारी कलराज मिश्र ने लखनऊ में राजधानी के प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक की।

बैठक में शामिल उनके समर्थक स्थानीय भाजपा नेता केक़़े शुक्ला कहते हैं कि अटलजी के न लड़ने पर कलराज मिश्रा भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण नेता होने के कारण लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए स्वाभाविक और सटीक उम्मीदवार हैं।

लालजी टंडन के समर्थक भी बैठकें करते हैं यद्यपि स्वयं उनका कहना है कि वह तो प्राय: रोज ही कार्यकर्ताओं के बीच उठते बैठते हैं और इसका लोकसभा चुनाव की प्रत्याशिता से कोई संबंध नहीं है। लखनऊ के महापौर डा़ दिनेश शर्मा भी एक दावेदार हैं हालांकि वह औपचारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहते सिवाय इसके कि पार्टी जो भी तय करेगी वह सभी को स्वीकार होगा।

लखनऊ सीट पर भाजपा का झंडा कौन उठायेगा यह अभी अधिकृत तौर पर भले ही अनिश्चित हो लेकिन एक बात सभी नेता स्वीकार करते हैं कि अगर वाजपेयी न लड़े तो फिर उनकी पसंद का ही व्यक्ति संसदीय क्षेत्र में उनका विकल्प होगा लेकिन पहले तो इंतजार स्वयं वाजपेयी की औपचारिक हां अथवा न का ही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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