बच्चों का हिस्सा खा रहे हैं पशु
वाराणसी, 20 मई (आईएएनएस)। कहते हैं कि बच्चे जितना स्वस्थ होंगे देश का भविष्य उतना ही मजबूत होगा। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बाल पुष्टाहार जैसे कई कर्यक्रम भी चला रही है, लेकिन अफसरों और ग्रामीण स्तर के कर्मचारियों की कालाबाजारी से उसका लाभ बच्चे तो नहीं ही उठा पा रहे हैं बल्कि बच्चों के लिए जारी किया गया यह पुष्टाहार लोग पशुओं को खिला रहे हैं जो सीधे गोदाम से ही बेच दिया जा रहा है।
बच्चों के इस पुष्टाहार के गोरखधंधे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों तक की मिलीभगत बताई जा रही है। शायद यही वजह है की वाराणसी के धन्नीपुर जैसे गांव में कुपोषण के शिकार एक साथ 14 बच्चे पाए जाने की खबर छपने से जिला प्रशासन में कुछ दिनों के लिए अफरा तफरी तो रहती है, लेकिन थोड़े ही दिनों बाद सब कुछ पहले की ही तरह सामान्य हो जाता है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से गरीब बच्चों के लिए बाल पुष्टाहार योजना चलाई गई है, जिसमें इस योजना के तहत बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विनिंग फूड और माइलेज इनर्जी फूड की व्यवस्था की गई है जो आगनबाड़ी सेंटर के माध्यम से गरीब बच्चों में बंटवाया जाता है।
अकेले वाराणसी की ही बात करें तो यहां 2529 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिसमें प्रति महीने 5 बोरी विनिंग फूड और 9 बोरी माइलेज इनर्जी फूड का वितरण किया जाता है। इस आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से 80 ग्राम प्रति बच्चा प्रति दिन बंटवाने का निर्देश है। लेकिन इसमें सिर से पांव तक भष्टाचार ही भ्रष्टचार व्याप्त होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
स्थिति यह है की बच्चों के लिए जारी किया गया यह अनाज लोग पशुओं को खिलाने के लिए खरीद रहे हैं। आलम यह है कि इच्छुक व्यक्ति को 150 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से सीधे गोदाम से ही डिलीवरी दे दी जा रही है। नाम न बताने की शर्त पर काशी विद्यापीठ ब्लाक के एक निवासी ने बताया कि बाजार में खली 25 रुपये किलो है और चुनी 12 रुपये प्रति किलो मिल रही है। वहीं आंगनबाड़ी से पुष्टाहार 150 रुपये में 25 किलो मिल जाता है। यानी 6 रुपये प्रति किलो का हिसाब पाता है। इसके अलावा सबसे अच्छी बात यह है कि फोन करने पर यह हमारे घर पर पहुंचा भी दिया जाता है।
बच्चों के पुष्टाहार के साथ यह कलाबाजारी दो स्तर पर हो रही है। एक तो यह जहां से गांवों के लिए पुष्टाहार दिया जाता है वहीं से प्रति पांच बोरी पर एक बोरी कमिशन के तौर पर ले लिया जाता है जिसे वहीं से बेच दिया जाता है जहां से यह बंटने के लिए निकलता है। दूसरा जब यह गांव में पहुंचता है तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थोड़ा बहुत बच्चों में बांटकर बाकी माल 150 रुपये के हिसाब से बेच देती हैं।
ताज्जुब की बात यह है कि यह सब कुछ दिन के उजाले में होता है और सबकी जानकारी में होता है लेकिन इस पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है।
इस विभाग के परियोजना निदेशक राम प्रवेश से इस बाबत बताया कि समय समय पर हम लोग औचक निरीक्षण करते रहते हैं। यदि कहीं अनियिमतता पाई जाती है तो कार्रवाई जरूर होती है। यह पूछने पर कि गरीबों के बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं और उनके लिए जारी किया गया पुष्टाहार का अन्न पशुओं को खिलाया जा रहा है। इस पर वाराणसी के परियोजना निदेशक ने कहा कि इस योजना के तहत बच्चों को दिया जाने वाला पुष्टाहार भोजन 80 ग्राम प्रतिदिन प्रति बच्चा का है। आप ही बताइए कि इस 80 ग्राम अन्न से कोई बच्चा कुपोषित नहीं होगा तो क्या होगा। वाराणसी के परियोजना निदेशक की यह दलील किसी को भी हतप्रभ करने के लिए काफी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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