शराब की बोतलों से बना महल!
भोपाल, 20 मई (आईएएनएस)। महलों के बारे में आपने बहुत पढ़ा और सुना होगा मगर एक ऐसा महल भी है जो शराब की बोतलों से बना है। शीश महल (बोतल हाउस) के नाम से प्रसिद्ध यह महल बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में है।
इस महल के बनने की कहानी कुछ निराली है। बात 1927 की है जब इस इलाके को ओरछा रियासत के नाम से जाना जाता था और यहां के राजा वीर सिंह जूदेव हुआ करते थे। उनके यहां दूसरी रियासतों के राजाओं के साथ खास मेहमानों के आने पर उनका स्वागत राजशाही अंदाज में हुआ करता था। मेहमानों के लिए खास तरह के व्यंजनों के साथ उम्दा किस्म की शराब भी परोसी जाती थी।
एक बार हजारों की तादाद में शराब की बोतलें इकट्ठा हो गईं। इन बोतलों को फेंका जा रहा था, तभी रियासत के बागबान और आस्ट्रेलिया के सर विडवर्न ने राजा वीर सिंह जूदेव को सलाह दी कि वे बोतलों से महल बना सकते हैं। राजा ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति दे दी।
सर विडवर्न ने 1927 से 1929 के बीच शराब की बोतलों को प्लास्टर ऑफ पेरिस की मदद से कुछ इस तरह जोड़ा कि बोतलों ने आशियाने का रूप ले लिया। इस महल को बनाने में वाट 69, हरी बीयर और वोदका की बोतलों का इस्तेमाल किया गया है। इस महल में कुल छह कमरे, रसोई, सौंदर्य प्रसाधन गृह और अतिथियों के बैठने के लिए फर्नीचर भी है। यह सब कुछ शराब की बोतलों से बना है।
राजपरिवार के सदस्य विश्वजीत सिंह बताते हैं कि यह महल सर विडवर्न की देख-रेख में बना था और वे ही इसमें रहा करते थे। दुनिया में संभवत: इस तरह का दूसरा कोई महल नहीं है जो शराब की बोतल से बना हो।
टीकमगढ़ से पांच किलोमीटर दूर गणेशगंज में बना यह महल हर किसी का दिल लुभा लेता है। शराब की बोतलें कुछ इस तरह से जोड़ी गई हैं कि वे रोमांचित कर देती हैं। इस महल को कुछ लोगों ने बदरंग जरूर किया है मगर अब भी वह बेजोड़ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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