ऊर्जा बचत के लिये छत्तीसगढ़ ने थामा सीएफएल बल्ब का दामन

रायपुर, 4 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के कार्यालय, सरकारी बोर्ड एवं निगम अब परंपरागत बल्ब की जगह काम्पेक्ट फलोरोसेंट लाइटिंग यानी (सीएफएल) से रोशन होंगे।

यह कदम ऊर्जा की बचत तथा बिजली की बढ़ती जरूरते पूरी करने के प्रयासों के तहत उठाया जा रहा है।

ऊर्जा विभाग के संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा ने आज आईएएनएस को बताया " ऊर्जा विभाग ने परंपरागत बल्बों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार के सभी कार्यालयों, बोर्ड्स, निगमों और सरकारी एजेंसियों के कार्यालय अब सीएफएल से रोशन होंगे।"

उन्होंने बताया कि सीएफएल बल्ब पंरपरागत बल्ब के मुकाबले दस गुणा ज्यादा चलते हैं और इनसे बिजली की महज एक-चौथाई खपत होती है।

टुटेजा ने बताया"परंपरागत बल्ब के इस्तेमाल पर प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।"

राज्य के नगर निकायों से भी सड़क ,पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर लगे बल्ब बदलने को कहा गया है। इसके अलावा हाई-मास्ट लाईट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी है।

उन्हें सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने और जरूरी उपकरण लगाने की हिदायत दी गयी है। परंपरागत बल्ब की जगह सीएफ एल को इस्तेमाल शुरू करने के सरकार के कदम का उद्देश्य बिजली बचाना और गर्मियों के मौसम में बिजली की अधिक खपत की समस्या से निपटना है।

नवंबर 2000 में, जब छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी, उस समय राज्य की बिजली की खपत करीब 900 मेगावाट थी। इन दिनों व्यस्ततम घंटों में यहां बिजली की मांग 2400 मेगावाट हो चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य बिजली बोर्ड (सीएसईबी) 1923 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है जबकि बाकी की बिजली उसे निजी कंपनियों और केंद्रीय पूल से लेनी पड़ती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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