महंगाई : आगे-आगे देखिए होता है क्या!

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। विभिन्न मौद्रिक व व्यापारिक उपायों के बावजूद महंगाई में तेजी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बाजार व व्यापारिक हलकों में फिलहाल चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। विभिन्न मौद्रिक व व्यापारिक उपायों के बावजूद महंगाई में तेजी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बाजार व व्यापारिक हलकों में फिलहाल चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विभिन्न जिंसों के उत्पाद शुल्क में कटौती से लेकर समाप्ति तक के फैसलों और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एक ही महीने में लगातार दो बार नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की घोषणा के बाद भी महंगाई दर में कमी के बजाए तेजी का सिलसिला जारी है।

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 19 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई दर बढ़कर पिछले 42 महीनों के उच्चतम स्तर यानी 7.57 फीसदी की ऊंचाई तक पहुंच गई।

इससे पूर्व 12 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई दर 7.33 फीसदी थी जबकि 29 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान महंगाई दर बढ़कर 41 महीनों के उच्चतम स्तर यानी 7.41 फीसदी तक पहुंच गई थी। नवंबर 2004 में महंगाई दर 7.68 फीसदी के रिकार्ड स्तर पर दर्ज की गई थी।

सरकार हालांकि दावा कर रही है कि विभिन्न मौद्रिक व आर्थिक उपाय आने वाले कुछेक सप्ताह में रंग लाना शुरू कर देंगे। अर्थशास्त्रियों व बाजार विशेषज्ञ संभावना जता रहे हैं सरकार व आरबीआई आने वाले सप्ताह महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में कुछ और उपायों की घोषणा कर सकती है। संभावित मौद्रिक उपायों में आरबीआई के द्वारा रेपो व रिवर्स रेपो दरों में वृद्धि की संभावना भी है।

बाजार समीक्षकों को अनुमान है कि केंद्रीय बैंक आने वाले दिनों में ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा कर सकती है। वहीं सरकार द्वारा कृषि जिसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा भी जोरों पर है। इससे पूर्व वायदा कारोबार पर गठित अभिजीत सेन कमेटी ने 29 मई को कृषि मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सरकार ने वर्ष 2007 के शुरू में जिंस वायदा बाजार और खाद्य उत्पादों की बढ़ती कीमतों के बीच के संबंधों की जांच के लिए योजना आयोग के सदस्य अभिजीत सेन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।

कमेटी के अध्यक्ष सेन ने रिपोर्ट सौंपने के बाद पत्रकारों से कहा कि पर्याप्त आंकड़ों के अध्ययन के बाद इस बात के सटीक प्रमाण नहीं मिले हैं जिसके आधार पर कहा जा सके कि वायदा कारोबार हाजिर कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

संभावना है कि सरकार गेहूं और चीनी की तर्ज पर तिलहन के लिए भी बफर स्टाक की व्यवस्था कर सकती है। इस संबंध में मांग तो बजट के पहले से ही की जा रही है। चीनी के कारोबार पर जारी सरकारी नियंत्रण को हटाने के संबंध में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। उधर सरकार द्वारा कम कीमतों पर खाद्य तेल की आपूर्ति के भी अगले 15-20 दिनों में शुरू हो जाने की संभावना है। हाल ही में सरकार ने गरीब लोगों को कम कीमत पर खाद्य तेल उपलब्ध कराने का फैसला किया था। इस बाबत पीईसी लिमिटेड द्वारा 24 हजार टन रिफाइंड पामोलिन तेल की खरीद कर ली गई है।

इससे पूर्व वर्ष 2008 के वित्त विधेयक पर संसद में अपने समापन भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने मंगलवार को कहा कि सरकार आने वाले दिनों में बासमती चावल के निर्यात पर प्रति टन 8 हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाएगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य को 1,200 डालर प्रति टन से घटाकर 1,000 डालर प्रति टन कर दिया जाएगा। गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है।

इसी भाषण में चिदंबरम ने बताया कि सरकार इस्पात व इस्पातजन्य उत्पादों के आयात पर जारी 5 फीसदी आयात शुल्क को समाप्त कर देगी। वित्त मंत्री ने इसके अलावा इस्पात के निर्यात पर जारी 5 से 15 फीसदी छूट को भी वापस लेने की योजना का खुलासा किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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