दक्षिण के तीन राज्यों में बाघों की संख्या को लेकर विवाद

कोयंबटूर, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने अपने नई गणना रिपोर्ट में नीलगिरी के नागरहोल-मुदमलाई-बांदीपुर-वायनांद सुरक्षित वन्य क्षेत्रों में बाघों की संख्या 266 बताई है। लेकिन केरल, तमिलनाडु, और कर्नाटक की सरकारों ने इससे असहमति प्रकट की है।

कोयंबटूर, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने अपने नई गणना रिपोर्ट में नीलगिरी के नागरहोल-मुदमलाई-बांदीपुर-वायनांद सुरक्षित वन्य क्षेत्रों में बाघों की संख्या 266 बताई है। लेकिन केरल, तमिलनाडु, और कर्नाटक की सरकारों ने इससे असहमति प्रकट की है।

राज्य सरकारों द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार इन सुरक्षित क्षेत्रों में बाघों की संख्या 290-295 के बीच है। यह संख्या डब्ल्यूआईआई द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से ज्यादा अधिक नहीं है। लेकिन पूरे देश में बाघों की कुल संख्या केवल 1411 होने के कारण इन आंकड़ों का महत्व काफी अधिक है।

तमिलनाडु का मुदमलाई संरक्षित क्षेत्र पूर्व में कर्नाटक के बांदीपुर रिजर्व और पश्चिम में केरल के वायनांद सुरक्षित वन क्षेत्र से घिरा हुआ है।

डब्ल्यूआईआई के अनुसार मुदमलाई और नीलगिरी क्षेत्र देश में बाघों की संख्या सबसे अधिक है।

नागरहोल-मुदमलाई-बांदीपुर-वायनांद सुरक्षित वन क्षेत्र तीन राज्यों में 10,800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। तीनों राज्य सामूहिक रूप से इस क्षेत्र का संरक्षण करते हैं जिससे बाघों को स्वतंत्र रूप से विचरण का मौका मिल सके ।

तीनों राज्य सरकारें डब्ल्यूआईआई के द्वारा प्रस्तुत संख्या से अधिक बाघों के आंकड़ें पेश कर रही हैं।

केरल के वायनांद में 10-15 बाघों के होने का अनुमान है। तमिलनाडु सरकार के अनुसार वन्य क्षेत्र में 105 बाघ होने का अनुमान है। लेकिन डब्ल्यूआईआई के आकंड़ों में यह संख्या केवल 61 है। मुदमलाई में बाघों की संख्या राज्य सरकार के अनुसार 80 बाघ हैं।

कुल मिलाकर राज्य सरकारों और डब्ल्यूआईआई के आंकड़ों में अंतर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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