मोतियाबिंद की गुत्थी सुलझने की उम्मीद

वाशिंगटन, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय मूल के एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने इस बात का पता लगा लिया है कि कैसे एक खास किस्म का प्रोटीन मोतियाबिंद के लिए जिम्मेदार होता है।

मिस्सौरी विश्वविद्यालय के के.कृष्ण शर्मा ने अपने शोध में पता लगाया कि कैसे इस प्रोटीन के निष्क्रिय होने के बाद 10 से 15 अमीनो अम्लों की सहायता से बने छोटे पेप्टाइड बनने लगते हैं जो कि मोतियाबिंद के लिए जिम्मेदार होते हैं।

शर्मा ने कहा कि आंखों के लेंस का 50 फीसदी हिस्सा प्रोटीन्स से बना होता है और इनमें से 90 फीसदी प्रोटीन क्रिस्टलीन होते हैं।

एक स्वस्थ्य व्यक्ति की आंखों में ये क्रिस्टलीन समय के साथ टूटकर पेप्टाइड में बदलते रहते हैं और साथ ही साथ इनकी सफाई भी होती रहती है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ इनके बनने की गति बहुत तेज हो जाती है और आंखों में मोतियाबिंद होने लगता है।

शर्मा के अनुसार, "चूंकि हमने इनके बनने की प्रक्रिया का पता लगा लिया है अत: अब हम इनका निर्माण रोकने के लिए कदम उठाएंगे। अगर हम सफल रहे तो हमें आंखों की देखभाल में भारी सफलता मिलेगी। "

गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय नेत्र संस्थान के अनुसार 70 से 80 आयुवर्ग के 42 फीसदी लोग और 80 से ज्यादा उम्र के 68 फीसदी लोग मोतियाबिंद से पीड़ित हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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