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बाहरी मंडियों में गेहूं ले जा रहे हैं पंजाब, हरियाणा के किसान

By Staff
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    चंडीगढ़, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाब और हरियाणा में केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों ने गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू कर दी है लेकिन दोनों राज्यों के किसान अपना गेहूं राज्य से बाहर की मंडियों में ले जा रहे हैं।

    चंडीगढ़, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाब और हरियाणा में केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों ने गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू कर दी है लेकिन दोनों राज्यों के किसान अपना गेहूं राज्य से बाहर की मंडियों में ले जा रहे हैं।

    भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के मुताबिक इस वर्ष गेहूं की अनुमानित पैदावार पंजाब में 150 लाख टन और हरियाणा में 100 लाख टन है। लेकिन सरकारी खरीदारी के पहले चार दिन के दौरान मंडियों में गेहूं की आवक उत्साहजनक नहीं रही।

    फिलहाल पंजाब की मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक मात्र 200-250 मीट्रिक टन और हरियाणा में 125-140 मीट्रिक टन हो रही है। खरीदारी शुरू होने के पहले तीन दिनों में हरियाणा की मंडियों में कुल 800 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई।

    गौरतलब है कि मंडियों में आने वाला ज्यादातर गेहूं नई फसल का नहीं है बल्कि किसानों द्वारा बचाकर रखे गए पिछले वर्ष का है। पंजाब और हरियाणा देश के खाद्यान्न भंडार में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान करते हैं।

    पंजाब में 1,600 से ज्यादा और हरियाणा में लगभग 400 गेहूं की मंडियां हैं। किसानों के लिए इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,000 रुपये प्रति क्विं टल निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष यह 750 रुपये प्रति क्विं टल था। लेकिन निजी कारोबारियों ने गेहूं की कीमतें 1,100 से 1,500 रुपये प्रति क्विं टल तक पहुंचा दी है।

    भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने आशंका जताई है कि पंजाब और हरियाणा के किसान अपना गेहूं मंडियों में लाने से परहेज कर सकते हैं। वे इसे निजी कारोबारियों को बेचना पसंद करेंगे। वे दूसरे राज्यों में भी ऊंची कीमतों पर गेहूं बेच सकते हैं।

    एफसीआई के प्रबंध निदेशक आलोक सिन्हा ने हाल ही में कहा था, "यदि पंजाब और हरियाणा के किसान सरकारी एजेंसियों को गेहूं बेचने से कतराते हैं तो मुश्किल होगी।"

    केंद्र सरकार ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा में निजी कारोबारियों को गेहूं की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। ऐसा करके सरकार चाहती है कि सरकारी एजेंसियां गेहूं की खरीदारी का लक्ष्य पूरा कर सकें ताकि सरकार को 1,600 रुपये प्रति की दर से गेहूं का आयात न करना पड़े।

    बीकेयू और किसानों ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे किसानों का शोषण हो रहा है।

    बीकेयू के पंजाब प्रांत के अध्यक्ष और पूर्व सांसद भूपिंदर सिंह मान ने आईएएनएस को बताया, "गेहूं की आवक में बढ़ोतरी 13 अप्रैल यानी बैसाखी के बाद ही होगी। उत्तर भारत के किसान इस परंपरागत त्यौहार के बाद ही फसलों की कटाई शुभ मानते हैं।"

    उन्होंने बताया कि पंजाब के संगरुर, मनसा और भटिंडा जैसे जिलों में फसल कटाई के लिए तैयार हैं। खरीदारी करने वाले अधिकारियों और किसानों का कहना है कि 13 अप्रैल के बाद गेहूं की आवक इतनी अधिक होगी कि पिछले वर्ष का रिकार्ड भी टूट सकता है।

    एफसीआई और पंजाब एवं हरियाणा के खरीदारी करने वाली एजेंसियों को उम्मीद है कि वे इस वर्ष 125 लाख टन गेहूं की खरीदारी करेंगे। मोहाली के निकट लंदरन के किसान किरपाल सिंह ने कहा, "सरकारी एजेंसियां थोक में खरीदारी करती हैं लेकिन पिछले दो-तीन वर्षो से निजी कारोबारियों की खरीदारी ने बाजार में प्रतिस्पर्धा ला दी है।"

    गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकारी एजेंसियों को पंजाब से अधिकतम 80.13 अरब रुपये और हरियाणा से अधिकतम 26.96 अरब रुपये के गेहूं खरीदे जाने की अनुमति दी है।

    हरियाणा के उप मुख्यमंत्री चंदर मोहन ने कहा, "हमने खरीदारी करने वाली सभी एजेंसियों को खरीदारी के 72 घंटे के अंदर किसानों को गेहूं की कीमत चुकाने के निर्देश दिए हैं।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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