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रक्षा. खामोश मोर्चा दो अंतिम नयी दिल्ली

By Staff
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आपरेशन रक्षक के दौरान कारगिल में 12 घुसपैठियों को मार गिराने पर वीर चक्र से सम्मानित हुए नायब सूबेदार चुन्नी लाल की रगों में बह रही आग शांत नहीं हुई थी1 गत 27 जून को आठ जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री के इस जांबाज फौजी को सूचना मिली कि कुपवाडा सेक्टर में घुसपैठ हो रही है1 सुराग मिलते ही चुन्नी लाल ने घुसपैठियों को पकडने के लिए जाल बिछा दिया और आतंकवादियों के बच निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए1 उन्होंने तीन आतंकवादियों को ठिकाने लगा दिया और उनकी बाकी टीम ने बाकी आतंकियों को मार गिराया1 इस दौरान नायब सूबेदार चुन्नी लाल के शरीर से लहू बहता रहा लेकिन सभी आतंकवादियों का सफाया होने तक उन्होंने प्राण नहीं त्यागे1 अशोक चक्र के तीसरे हकदार कैप्टन हर्षन ने 20 मार्च 2007 को देश के लिए बलिदान किया1 कश्मीर की लोलाब घाटी के छोटी मार्गी इलाके में कैप्टन को खूंखार आतंकवादियों के एक जत्थे की मौजूदगी की खबर मिली1 भारी हिमपात के बीच कैप्टन हर्षन ने एक टुकडी के साथ उस घर की नाकेबंदी कर ली जहां ये आतंकी छिपे हुए थे1 घनेरी रात और जोरदार बर्फबारी का फायदा उठाकर चार आतंकवादी अंधाधुंध फायरिंग करते हुए सैनिकों को घेरा तोडने में कामयाब हो गए और कैप्टन हर्षन के ठीक सामने आ गए1 अकेला होने के बावजूद इस जांबाज अफसर ने हिम्मत नहीं हारी और एक आतंकवादी को गोली से उडा दिया1 लेकिन इस दौरान एक गोली कैप्टन हर्षन की गर्दन को चीरती हुई निकल गयी1 लेकिन कैप्टन हर्षन की हिम्मत को वह गोली भी नहीं भेध पायी1 वह गिर पडे पर अपने साथी सैनिकों की लगातार हौसला अफजायी करते रहे1 अपने अफसर की बहादुरी देखकर उनकी टीम ने बाकी दो आतंकवादियों को ठिकाने लगा दिया1 तब तक कैप्टन हर्षन की आंखे तो खुली थी लेकिन उनके प्राण पखेरू हो गए थे1 कैप्टन हर्षन के पिता श्री राधाकृष्णन अपने बहादुर बेटे का अशोक चक्र लेकर जाएंगे1 कौशिक संजीव वीरेन्द्र1816 वार्ता

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