राजनीति. भाकपा कांग्रेस दो नयी दिल्ली..

कांग्रेस दो नयी दिल्ली.. श्री बद्र्धन ने विदेश एवं अर्थनीति के संदर्भ में कांग्रेस तथा भाजपा को एक समान बताते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए दोनों जो नीति अपनाती है. विपक्ष में आने पर कभी कभी उसका विरोध करती है. लेकिन इनका फर्क मूलत. धर्मनिरपेक्षता के सवाल को लेकर है और भाजपा .खुले तौर पर दक्षिणपंथी साम्प्रदायिक पार्टी. है

राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे में इसी संदर्भ में .भाजपा की साम्प्रदायिक एवं प्रतिक्रियावादी नीतियों के खिलाफ. संघर्ष जारी रखने. उसे सत्ता से बाहर रखने और इस उपक्रम में .फौरी रणनीति के तहत कांग्रेस से सहयोग जारी रखते हुए धर्मनिरपेक्ष. लोकतांति्रक सत्ता व्यवस्था के प्रति समर्थन की घोषणा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है1 प्रस्ताव में कहा गया है कि .जन हित के क्रांतिकारी कार्यक्रम पर आधारित वाम लोकतांति्रक विकल्प अपने आप नहीं बन जायेगा. यह साा संघषो से उभरेगा1 लेकिन संभव है. कि इस क्रम में संक्रमण अवधि में एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांति्रक दौर भी चले1. सत्ता में वापसी की भाजपा की कोशिशों को विफल करने के लिये भाकपा इस संक्रमण अवधि में क्या ख अपनायेगी. यह खास समय की परिस्थिति विशेष पर निर्भर करेगा1. वैसे अभी. पिछले रविवार को माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने भी माकपा की 19वीं पार्टी कांग्रेस के लिए राजनीतिक प्रस्ताव का मसौदा जारी करते हुये भाजपा को .दुश्मन नम्बर एक. बताकर इसी फौरी व्यवस्था को जारी रखने का संकेत दिया था1 ग्यातव्य है कि उन्होंने भी .नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के बरकात. आमजनों. किसानों के हित की आर्थिक कार्यक्रमों. देश की एकता एवं अखंडता. संप्रभुता की रक्षा तथा दुनिया में बहुध्रुवीयता प्रोत्साहित करने के कार्यक्रम पर आधारित तीसरे विकल्प के निर्माण को अपना दीर्धकालिक लक्ष्य बताया था

राजेश संजीव जगबीर1834जारी वार्ता

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