रिलायंस इन्फोकॉम ने भरे 800 करोड़ रुपये
नई दिल्ली, 29 नवम्बरः रिलायंस इन्फोकॉम ने विदेशी फोन कॉलों को गलत तरीके से घरेलू कॉल दिखाने के मामले में सरकारी कंपनियों को भरपायी और दंड के रुप में कुल 810.31 करोड़ रुपये भरे हैं.
यह जानकारी दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री शकील अहमद ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी. उन्होंने बताया कि कंपनी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जा चुकी है और इसका लाइसेंस रद्द करने का कोई विचार नहीं है.
अहमद ने बताया कि वर्ष 2004 के दौरान मैसर्स रिलायंस इन्फोकाम लिमिटेड (आर आई एल) ने कतिपय इनकमिंग आईएसडी कॉलों की कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन के साथ छेड़छाड़ करके कालों को घरेलू कॉलों के रुप में दर्शाकर आगे भेजा तथा इस प्रकार उन्होंने महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एम टी एन एल) और भारत संचार निगम लिमिटेड (बी एस एन एल) को दिये जाने वाले सांविधिक अभिगम घाटा (एडीसी) प्रभारों का भुगतान नहीं किया. एमटीएनएल और बीएसएनएल ने अपने इंटरकनेक्ट करारों के अनुसार मैसर्स रिलायंस इंडिया लिमिटेड को क्रमशः 341.27 करोड़ रुपये और 319.04 करोड़ रुपये के बिल दिए थे. मैसर्स आरआईएल ने इनका भुगतान कर दिया है. यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में निर्णयाधीन है.
केन्द्र ने भी इस मामले में आरआईएल को अभिगम घाटा प्रभारों (एडीसी) से बचने के लिये इनकमिंग आईएसडी कालों की कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (सीएलआई) से छेड़छाड़ करने के बारे में कारण बताओ नोटिस जारी किया और कालों पर कुल 150 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. इसके खिलाफ मैसर्स आरआईएल ने दूरसंचार विवाद समाधान और अपील अधीकरण (टीडीएसएटी) में अपील की थी. अपील खारिज होने पर उसने मार्च 2005 में 150 करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान कर दिया.
आरआईएल ने टीडीएसएटी के निर्णय के विद्ध उच्चतम न्यायालय में एक सिविल याचिका दायर की है और यह मामला निर्णयाधीन है.
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