New Covid strain in India:Coronavirus का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है और वैक्सीन पर इसका असर क्या होगा ?
नई दिल्ली-यूके में कोरोना वायरस का जो नया स्ट्रेन सामने आया है, उसको लेकर दुनिया भर में हड़कंप मच गई है। क्योंकि, यूके में इस संक्रामक वायरस के नए स्ट्रेन (new strain of coronavirus in UK) को अनियंत्रित (Out of control) बताया जा रहा है। वैसे जो वैज्ञानिक नोवल कोरोना वायरस (novel coronavirus) में हुए खतरनाक म्युटेशन (mutation) पर रिसर्च कर रहे हैं, उन्हें यही लगता है कि म्युटेशन का असल में कैसा प्रभाव पड़ा है, इसके बारे में अभी तक ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन, चौंकाने वाला तथ्य ये है कि हाल में यूके (UK) में ऐसे मामले बड़ी तादाद में पाए गए हैं, जिनमें कि कोरोना वायरस के नए वंश (The new lineage) की मौजूदगी पाई गई है, जिसका कोड B.1.1.7 दिया गया है। कोरोना वायरस में हुए इस नए बदलाव के बारे में वैज्ञानिकों की क्या राय है, हम यहां उसी के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

क्या वायरस में बदलाव होना असामान्य है ?
वैज्ञानिकों की राय में वायरसों में बदलाव होना बहुत ही सामान्य सी बात है। यूनिवर्सिटी ऑफ लिसिस्टर (University of Leicester) के क्लीनिक वायरलॉजिस्ट डॉक्टर जुलियन टैंग ने कहा है, 'वायरसों के लिए यह बहुत ही सामान्य सी बात है जैसे कि इंफ्लूएंजा....जैसे कि एक ही इंसान कई तरह का वायरस से प्रभावित हो सकता है, जिसकी वजह से हाइब्रिड वायरस पैदा हो सकता है। यह सिर्फ एक प्राकृतिक जरिया है, जिससे वायरस में बदलाव आता है।' हालांकि, वायरस के बर्ताव में कैसा बदलाव होगा यह इस पर निर्भर करता है कि संबंधित वायरस में किस तरह का म्युटेशन (mutation) होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपुल (University of Liverpool) के इंफेक्शन एंड ग्लोबल हेल्थ के चीफ प्रोफेसर जुलियन हिस्कॉक्स के मुताबिक, 'कोरोना वायरस हर समय बदलता रहता है। इसलिए कोविड-19 (SARS-CoV-2) का जो नया रूप आया है ,वह कोई अचनाक नहीं है, हम ऐसा मानवीय और जानवरों के कोरोना वायरस में हमेशा ही देखते हैं। '
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कोरोना वायरस में हुआ नया बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन (China) के वुहान (Wuhan) में जब से कोविड-19 का खुलासा हुआ है, तब से इस बहुरूपिये ने कई रूप बदल लिए हैं। लेकिन, यूके में जो B.1.1.7 कोड वाला कोविड-19 का नया स्ट्रेन मिला है उसके शुरुआती जीनोम के लक्षणों (genomic characterisation) में असामान्य तौर पर बहुत ज्यादा आनुवंशिक परिवर्तन (genetic changes) देखा जा रहा है। खासकर इसकी स्पाइक प्रोटीन में बहुत ज्यादा बदलाव हो चुका है, जो कि मानवीय कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होते हैं। इसी के चलते यूके में अलर्ट कर दिया गया है और पूरी दुनिया में इसको लेकर दहशत बढ़ गई है और कई देश यूके से आवाजाही को प्रतिबंधित कर रहे हैं और भारत में भी सरकार इसपर सचेत है।

क्या कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन बहुत ज्यादा खतरनाक है?
यूके (UK)की सरकार को डर है कि कोरोना का नया स्ट्रेन बहुत ही ज्यादा संक्रामक है और यह पुराने स्ट्रेन से कहीं ज्यादा तेजी से लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसे और ज्यादा समझने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसे भी एक्सपर्ट हैं जो यूके सरकार की चिंता को पूरी तरह से वाजिब मान रहे हैं। मसलन, ब्रिटिश सोसाइटी फॉर इम्युनोलॉजी के पूर्व प्रेसिडेंट प्रोफेसर पीटर ओपनशॉ ने कहा है, 'इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। हालांकि, 30,000 न्युक्लियोटाइड्स के जेनेटिक कोड में से सिर्फ 23 म्युटेशन हुए हैं, लेकिन नया प्रकार 40 से 70 फीसदी ज्यादा संक्रामक नजर आता है।' हालांकि, उन्होंने एक राहत की जानकारी यह भी दी है कि इस समय ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो कि कोरोना के नए रूप से जो बीमारी होती है, वह पहले के कोविड-19 से होने वाली बीमारी से कोई अलग है। वॉरविक मेडिकल स्कूल के ऑनररी क्लीनिकल लेक्चरर डॉक्टर जेम्स गिल ने कहा है, 'हम अभी भी इस नए स्ट्रेन के बारे में और ज्यादा जानना चाह रहे हैं........यह ज्यादा संक्रामक प्रतीत होता है, लेकिन हम नहीं जानते कि यह ज्यादा खतरनाक है या कम खतरनाक। इसलिए, ज्यादा कड़ी पाबंदियां उचित ही हैं।'

क्या नए स्ट्रेन से कोविड-19 की मौजूदा जांच प्रभावित होगी ?
आमतौर पर नहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक पीसीआर टेस्ट में मोटे तौर पर तीन चैनल का इस्तेमाल होता है। सिर्फ एक ही चैनल ऐसा है, जिसमें नए स्ट्रेन की वजह से रिजल्ट निगेटिव आ सकता है। लेकिन, अगर जांच के लिए तीनों चैनल का उपयोग सही तरीके से होगा तो सही नतीजे आएंगे। वेलकम सैंगर इंस्टीट्यूट में कोविड-19 जीनोमिक्स इनिशिएटिव के डायरेक्टर डॉक्टर जेफरी बारेट के मुताबिक, 'मुझे किसी कॉमर्शियल टेस्ट के बारे में जानकारी नहीं है जो इस वायरल जीनोम के सिर्फ एक टारगेट का इस्तेमाल करता है। लेकिन, अगर कोई ऐसा करता है तो उसे सावधानी से जांच करनी चाहिए।' एसोसिएशन फॉर क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री एंड लैबोरेटरी मेडिसीन में माइक्रोबायलॉजी प्रोफेशनल कमिटी के चीफ डॉक्टर रॉबर्ट शॉर्टेन ने कहा है, 'लैब्स को पता है कि उन्हें किस जीन को टेस्ट के लिए टारगेट करना है और वह टेस्ट के परफॉर्मेंस को लेकर बहुत ही सजग रहते हैं। पीसीआर टेस्ट आमतौर पर एक से ज्यादा जीन को टारगेट करते हैं, इसलिए स्पाइक प्रोटीन में एक म्यूटेशन से दूसरे जीन की जांच प्रभावित नहीं होगी।'

क्या नए स्ट्रेन से वैक्सीन या इलाज पर असर पड़ेगा?
हालांकि, यूके (UK) में जिस नए स्ट्रेन का पता चला है, वह बहुत ही चिंताजनक है, लेकिन एक्सपर्ट की नजर में अब तक ऐसा कोई कारण नजर नहीं आ रहा है कि इस म्युटेशन के चलते वैक्सीनेशन (vaccination) ड्राइव पर कोई असर पड़ेगा। यूके सरकार की एक्सपर्ट एडवाइजरी एजेंसियों ने इस संबंध में जो एडवाइजरी जारी की है, उसमें कहा गया है, 'हमने अभी तक बीमारी में कोई ज्यादा गंभीरता नहीं देखी है या स्पाइक में ही कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा है, जिससे कि वैक्सीन का प्रभाव कम हो जाए।' वेलकम ट्रस्ट के डायरेक्टर डॉक्टर जर्मी फरार भी भविष्य के लिए चेतवानी के साथ ही फिलहाल इसे वैक्सीन या इलाज के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं मान रहे हैं, 'इस समय ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नए स्ट्रेन (new strain) पर इलाज या वैक्सीन का असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, म्युटेशन वायरस की शक्त के प्रति आगाह करता है और भविष्य में ऐसी आशंकाओं से इनकार भी नहीं किया जा सकता।'












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