World Organic Day 2024: सामने 'मौत' देखकर आया 'उत्तम' आइडिया, बिहार के युवा की सक्सेस स्टोरी
Uttam Kumar Success Story: 'साल 2017 में महावीर कैंसर अस्पताल पटना में रोजाना ना जाने कितने ही लोगों को जिंदगी और मौत के बीच जूझते देखा करता था? उनमें से अधिकांश को जान गंवानी ही पड़ती थी। मौत की वजह फल-सब्जियों व फसलों में केमिकल के प्रयोग से हमारे शरीर में पहुंच रहा 'जहर' था। बस अकाल मौत की इसी कड़ी को तोड़ने का आइडिया आया, जो काम कर गया।' यह है उत्तम कुमार का।
उत्तम कुमार बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं। जैविक खेती में अग्रणी स्टार्टअप एयू बायोटेक के संस्थापक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। 22 सितंबर 2024 को मनाए जा रहे विश्व जैविक दिवस के मौके पर उत्तम कुमार ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में जैविक खेती के बारे में कई बातें शेयर की हैं।

उत्तम कुमार कहते हैं कि रासायनिक पदार्थों की वजह से होने वाली मौतों पर ब्रेक लगाने, लोगों की सेहत और किसानों की आमदनी बढ़ाने की ठानकर साल 2018 में नोएडा आ गए। ताकि यहां पर रैप्चर बायोटेक में फूड एवं न्यूट्रास्यूटिकल लैब में ट्रेनिंग के साथ टेस्टिंग ट्रायल करके सकें। पता लगाया जा सके कि फूड में पोषण, पेस्ट्रीसाइड एवं विषाक्त पदार्थों में कितना लेवल से स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
नोएडा में सालभर की ट्रेनिंग के बाद साल 2019 में वापस भागलपुर लौटे और ऑर्गेनिक फार्मिंग स्टार्टअप शुरू किया। अब ये बिहार में जैविक खेती को लेकर खेत-खलिहान तक पहुंच रहे हैं और किसानों को जागरुक करते हैं। किसानों के साथ पायलट प्रयोग (शाहकुण्ड के किशनपुर अमखोरिया, जगरनाथपुर, नारायणपुर, करहरिया, हाजीपुर, चांदपुर एवं मोहनपुर में कर रहे हैं।

उत्तम कुमार की मेहनत का नतीजा यह है कि जो किसान 10 किलो रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे थे। यही काम 6 किलो 6 वर्मी कम्पोज्ट व गोबर खाद से हो जा रहा है। पौधे में बीमारियां घट गईं। पहले की तुलन में उत्पादन बढ़ गया और जो कैंसर पांच साल में जकड़ लेती थी। उसे कम से कम नौ साल लग रहे।
उत्तम कहते हैं कि खेती में तकनीक अपनाए, व्यावसायिक तरीके से खेती करें तो एक सीजन में एक साथ एक से ज्यादा बार उत्पादन लिया जा सकता है ताकि मार्केट में अच्छा रेट मिले और जैविक खेती से लोगों को खाने से पोषण भी मिल सके।

उत्तम कुमार के संकल्प
1. किसान एक साथ अनेक फसल उगाए।
2. पोषण युक्त एवं रसायन मुक्त उपजाए।
3. किसान, परिवार एवं समाज के लोगों में स्वास्थ्, समृद्धि आए।
4. मौसमी सब्जी, फल को उगाए, लोकल को अपनाए।
5. किसानों के उत्पाद को अच्छा मूल्य के साथ बाज़ार मिलेगा।
6. ग्रामीण इलाके में लोगो को रोजगार भी मिलेगा।
7. गांव आत्मनिर्भर बनेगा। बिहार आत्मनिर्भर बनेगा।

100 फीसदी केमिकल खेती के नुकसान
1. पौधे में बीमारी आ रही हैं।
2. फसल का उत्पादन घट रहा है।
3. मिट्टी खराब हो रही है।
4. पोषण युक्त भोजन नहीं मिल रहा है।
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