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Success Story: IFS बनने की ज़िद में श्रेया त्यागी ने 4 बार पास की UPSC, 31वीं रैंक लाकर भी IAS पद ठुकराया

Shreya Tyagi IFS Officer: कभी-कभी सिर्फ़ सपने देखना काफ़ी नहीं होता, उन्हें ज़िद बना लेना जरूरी होता है। श्रेया त्यागी की सक्सेस स्टोरी भी कुछ ऐसी ही है। एक शांत-सी लड़की, जिसने भारत की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को न सिर्फ़ एक बार, बल्कि चार बार क्रैक किया। वो भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि उसे अपना सपना अधूरा मंज़ूर नहीं था।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के छोटे-से गांव पुरा से निकलकर, दिल्ली, जेएनयू, फिर साल दर साल UPSC CSE पास करके श्रेया त्यागी ने यह साबित किया कि असली सफलता रैंक में नहीं, लक्ष्य की स्पष्टता में होती है। जब ज्यादातर लोग IAS बनना अपना सपना मानते हैं, श्रेया ने IAS बनने के बाद भी उसे छोड़ दिया, क्योंकि उनका सपना भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service - IFS) था। सिर्फ़ वही मंज़िल उन्हें मंज़ूर थी।

Shreya Tyagi IFS Officer

साल 2024 में UPSC परीक्षा को चौथी बार सफलतापूर्वक पास करने वालीं श्रेया त्यागी की मोटिवेशनल स्टोरी का आज जिक्र इसलिए है कि 5 अगस्त 2025 को UPSC ने सफल उम्मीदवारों को सर्विस कैडर अलॉट किया है। श्रेया को इस बार उनकी मनपसंद सेवा IFS मिली है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर 31वीं रैंक हासिल करने वाली श्रेया IAS या IPS जैसी शीर्ष सेवाओं में भी चयनित हो सकती थीं।

श्रेया त्यागी के पिता एक बैंक अधिकारी हैं और माँ एक गृहिणी। पढ़ाई में शुरू से ही होशियार श्रेया ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू से राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पढ़ाई की। लेकिन असली प्रेरणा तब मिली, जब वह बहरीन में थीं। वहाँ भारतीय दूतावास को काम करते देखा और तभी दिल में एक सपना पलने लगा-"मैं एक दिन भारत की राजनयिक बनूंगी।"

श्रेया त्यागी की UPSC रैंकिंग

  • पहला प्रयास (2020): 319वीं रैंक - Indian Defence Accounts Service (IDAS)
  • दूसरा प्रयास (2021): रिज़र्व लिस्ट में 4वीं रैंक - Indian Trade Service (ITS)
  • तीसरा प्रयास (2022): 123वीं रैंक - Indian Revenue Service (Income Tax) - IRS (IT)
  • चौथा प्रयास (2024): 31वीं रैंक - Indian Foreign Service (IFS)

सपनों की परिभाषा बदलने वाली बेटी

जब वो UPSC क्रैक करने के बाद अपने गांव लौटीं तो फूल-मालाओं से स्वागत हुआ। लोगों ने गर्व से कहा, "ये हमारी बिटिया है, जिसने पूरे ज़िले का नाम रोशन किया है।" लेकिन शायद उन्हें यह नहीं पता कि इस बेटी ने सपनों की परिभाषा ही बदल दी है।

चीन में काम करना चाहती हैं श्रेया

IFS को लेकर उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवा को भी स्वीकार नहीं किया। उनके लिए पद नहीं, मिशन मायने रखता था। चीन में भारत की राजनयिक बनकर काम करने की इच्छा उनके भीतर की बौद्धिक जिज्ञासा और रणनीतिक सोच का प्रमाण है। वह मानती हैं कि भारत की विदेश नीति में चीन को समझना बहुत अहम है और वह उसमें योगदान देना चाहती हैं।

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