Pawan Kumar: ट्रक चालक का बेटा बना IAS, 8 बार फेल होकर भी नहीं मानी हार, पहले RPSC फिर UPSC पास की
IAS pawan Kumar Success Story: राजस्थान के नागौर जिले के गांव सोमना के पवन कुमार प्रजापत के पिता ने इनको मिट्टी के बर्तन बनाकर व ट्रक चलाकर पढ़ाया। ये नौवें प्रयास में यूपीएससी की पास कर पाए।

IAS pawan Kumar Motivational Story : 'कभी हार मत मानो। ना ही कभी मेहनत करना छोड़ो। हालात कितने भी विकट हो। चाहे धारा के विपरीत ही क्यों ना चलना पड़े। ठान लें तो सफलता एक ना एक दिन कदम जरूर चूमती है।' हर किसी को प्रेरित करने वाले ये वाक्य आए दिन सुनने व पढ़ने को मिलते हैं, मगर इन्हें राजस्थान के पवन कुमार प्रजापत ने हकीकत में बदला है।
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पवन कुमार नौवें प्रयास में बने आईएएस
पवन कुमार प्रजापत वो शख्स हैं, जिन्होंने आखिरी प्रयास तक संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा देना नहीं छोड़ा। हर बार की असफलता भी इनकी हिम्मत नहीं तोड़ पाई। अंतिम व नौवें प्रयास में पवन कुमार प्रजापत आईएएस बन गए। अभी प्रशिक्षण पर हैं।

आईएएस पवन कुमार का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में पवन कुमार प्रजापत ने अपने संघर्ष व सफलता की पूरी कहानी बयां की। इनके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। पिता ने मिट्टी के बर्तन बनाकर व ट्रक चलाकर पढ़ाया। पहले ये राजस्थान प्रशासनिक सेवा और फिर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास की।

आईएएस पवन कुमार प्रजापत का परिवार
पवन कुमार आईएएस ने बताया कि वे मूलरूप से राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील के गांव सोमना के रहने वाले हैं। ट्रक चालक पिता रामेश्वर लाल का साल 2022 में 16 अक्टूबर को जयपुर के पास सड़क हादसे में निधन हो गया। मां बिरजु देवी हाउसवाइफ हैं।
पत्नी सुमन देवी निजी डॉक्टर हैं। ये नागौर जिले के गांव कठौती की रहने वाली हैं। इनके एक बेटा पार्थ है। पवन का छोटा भाई आनंद प्रजापत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। दो बहन बाया व बबीता की शादी हो चुकी है जबकि दो बहन दुर्गा व रेखा अविवाहित हैं।

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने छोड़ा गांव
पवन का परिवार शुरुआती दिनों अपने गांव सोमना में रहता था। कक्षा पांच तक की पढ़ाई भी गांव से ही हुई। तब पिता मिट्टी के बर्तन बनाने का पुश्तैनी काम करते थे। बेटे पवन की पढ़ाई के चलते पिता नागौर जिला मुख्यालय पर आकर रहने लगे और ट्रक चलाना शुरू कर दिया। पवन ने नागौर के टैगोर सेंट्रल स्कूल से पढ़ाई की। फिर राजकीय डेंटल कॉलेज जयपुर से डिग्री ली।

पवन की तीन बार लगी सरकारी नौकरी
बता दें कि पवन कुमार प्रजापत आईएएस बनने से पहले सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट, राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं। दो बार आरएएस परीक्षा दी। 2015 में पहली बार में 568वीं और साल 2018 में दूसरी बार में 308वीं रैंक हासिल की। आरएएएस बनकर बाड़मेर जिला उद्योग केंद्र में सहायक निदेशक बने। इस पद पर रहते ही संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 पास कर ली। 551वीं रैंक पाकर दानिक्स कैडर में आईएएस बने।

पवन कुमार प्रजापत की यूपीएससी का सफर
आईएएस अफसर बनने के लिए पवन कुमार प्रजापत को करीब एक दशक लग गया। साल 2013 में पहली बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में भाग लिया था। ओबीसी को कुल नौ मौके मिलते हैं। पवन कुमार का चयन नौवें व आखिरी प्रयास में हुआ। अपनी यूपीएससी की यात्रा में पवन कुमार ने प्री हर बार निकाली। तीन बार इंटरव्यू तक भी पहुंचे, मगर आठ बार के प्रयास में चयन नहीं हुआ। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में सफलता मिली।

यूपीएससी में हिंदी माध्यम बना सबसे बड़ी बाधा
पवन कुमार प्रजापत कहते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम से हिस्सा लेने का मतलब धारा के विपरीत चलना है। पहले हिंदी माध्यम वाले अभ्यर्थियों की सफलता का प्रतिशत 5 रहा करता था, जो अब गिरकर 2 प्रतिशत तक पहुंच गया। यूपीएससी में सफल होने वाले 95 प्रतिशत अभ्यर्थी अंग्रेजी माध्यम से होते हैं। इसके बावजूद पवन कुमार ने हिंदी नहीं हारी। हालांकि साल 2021 में ही हिंदी माध्यम से रवि सिहाग ने 18वीं रैंक हासिल की थी।
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