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Mysore Sandal Soap: उम्र 100 साल से ज्यादा लेकिन जलवा आज भी बरकरार, गजब है देश के पहले सैंडल सोप की कहानी

Mysore Sandal Soap success story: फिल्मी अदाकारा 'तमन्ना भाटिया' को लेकर इस वक्त कर्नाटक में जबरदस्त ढंग से भूचाल आया हुआ, दरसअल तमिलनाडु अभिनेत्री तमन्ना भाटिया को कर्नाटक के प्रतिष्ठित ब्रांड 'मैसूर सैंडल सोप' का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है, जो कि स्थानीय लोगों को बिल्कुल भी रास नहीं आया और इसी वजह से कुछ संगठन और विपक्ष इस बात के लिए सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

इन लोगों का कहना है कि Mysore Sandal Soap राज्य का गौरव है इसलिए इसका विज्ञापन कर्नाटक के कलाकारों से करवाना चाहिए ना कि किसी बाहरी व्यक्ति से, ये लोकल कलाकारों का अपमान भी है और अन्याय भी।

Mysore Sandal Soap

हालांकि कर्नाटक सरकार ने इस बारे में अपना पक्ष साफ कर दिया है लेकिन विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तमन्ना ने दो साल के लिए ये डील साइन की है, वो भी 6.2 करोड़ में, हालांकि इस बारे में अभी तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Mysore Sandal Soap की कहानी रोचक

आपको बता दें कि Mysore Sandal Soap कभी राजा-रानी का साबुन कहलाता था। ये 100 साल से भी ज्यादा वक्त से कर्नाटक के लोगों के दिलों पर राज कर रहा है, ये यहां के लोगों के लिए केवल एक साबुन नहीं है बल्कि उनकी भावनाओं और प्रतिष्ठा का भी मानक बन चुका है।

राजा कृष्ण वाडियार चतुर्थ ने की थी कंपनी की स्थापना

गौरतलब है कि मैसूर संदल कारखाने की स्थापना 10 मई, 1916 को राजा कृष्ण वाडियार चतुर्थ ने की थी, कहा जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध के पहले यूरोपीय देशों को चंदन तेल मैसूर से निर्यात किए जाते थे लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के के बाद ये संभव नहीं था, तब तेल को पाउडर में मिलाकर, साबुन बनाकर यूरोप भेजा जाने लगा और यहीं से चंदन के साबुन की शुरुआत हुई।

बेंगलुरु में खुली मैसूर के साबुन की फैक्ट्री (Mysore Sandal Soap)

तब इस साबुन का इस्तेमाल राजमहल के लोग ही किया करते थे क्योंकि ये बहुत महंगा होता था। साल 1918 में मैसूर के राजा कृष्ण वाडियार ने 'बेंगलुरु' में मैसूर के साबुन की पहली फैक्ट्री की स्थापना की थी, उन्होंने इसके अलावा 'शिमोगा' में भी इसकी फैक्ट्री खोली थी लेकिन देश के आजाद होने और कर्नाटक के एकीकरण के बाद, ये फैक्ट्रियां कर्नाटक सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गईं।

कंपनी का 'लोगो' Sharabha है, जो कि शक्ति का मानक है

साल 1980 में सरकार ने चंदन के साबुन की इस फैक्ट्री को Karnataka Soaps and Detergents Limited में शामिल किया। इस कंपनी का 'लोगो' Sharabha है, जो कि आठ पैरों वाले एक आंशिक सिंह रूपी देव हैं, इनका शरीर तो शेर की तरह है लेकिन सिर 'गज' यानी 'हाथी' के समान है।

शेर या हाथी से भी अधिक शक्तिशाली Sharabha

संस्कृत साहित्य में इन्हें शेर या हाथी से भी अधिक शक्तिशाली बताया गया है। ये ज्ञान, साहस और शक्ति के मानक हैं। अब ये कंपनी साबुन के अलावा पाउडर, धूपबत्ती और डिटर्जेंट भी बनाने लग गई है। खास बात ये है कि यह दुनिया का इकलौता साबुन है जिसमें शुद्ध चंदन का तेल (Pure Sandalwood Oil) प्रयोग किया जाता है।

'मैसूर सैंडल सोप' भारत के हर किराने और कॉस्मेटिक दुकानों में आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा यह Amazon, Flipkart, जैसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर भी उपलब्ध है। आम तौर पर 75 ग्राम के एक साबुन की कीमत ₹40 से ₹60 के बीच है।

'कर्नाटक का गौरव' कहलाता है 'मैसूर सैंडल सोप'

इस साबुन ने राजमहल के जीवन से आज की आधुनिकता तक का सफर तय किया है इसलिए ये 'कर्नाटक का गौरव' के रूप में भी परिभाषित होता है। आज बाजार में एक से एक महंगे-सस्ते ब्रांड के साबुन मौजूद हैं लेकिन Mysore Sandal Soap की उपयोगिता मार्केट में बनी हुई है इसको पसंद करने का अपना एक वर्ग है।

'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक 'मैसूर सैंडल सोप' बनाने वाली कंपनी KSDL (कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट लिमिटेड) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹415 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ कमाया था।

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