Pawan Kumar Success Story: 'चपरासी' पवन कुमार बना RAS अफसर, कभी घर-घर जाकर सब्जियां भी बेचीं
Pawan Kumar Motivational Story: आरएएस 2021 में 170वीं रैंक हासिल करने वाले पवन कुमार राजस्थान के बाड़मेर जिले के बटाडू के गांव भीमड़ा के रहने वाले हैं।
Pawan Kumar RAS Topper 2023: राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर इलाके बाड़मेर के गांव भीमड़ा में पले-बढ़े पवन कुमार ने चपरासी से लेकर आरएएस अफसर बनने तक का सफर तय किया है। हाल ही घोषित आरएएस 2021 के नतीजों में पवन कुमार ने 170वीं रैंक हासिल की।
पवन कुमार की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को तरक्की की राह में रोड़ा मानते हैं। खुद पर भरोसा नहीं रखते और मेहनत करना छोड़ देते हैं। पवन कुमार ने मजदूरी करके भी खुद की पढ़ाई का खर्च निकाला है।

आरएएस पवन कुमार का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में पवन कुमार ने बताया कि वे वर्तमान में जैसलमेर नगर परिषद में राजस्व अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले पटवारी, रेलवे में गैंगमैन व आर्मी में चपरासी के रूप में भी कार्य किया है। एक बार नौकरी लगने के बावजूद अफसर बनने के लिए हमेशा प्रयास करता रहे। साल 2023 में सफल हो गए।

पवन कुमार की शिक्षा व नौकरी
पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने साल 2008 में दसवीं कक्षा में 61 प्रतिशत, 2010 में बारहवीं कक्षा में 70 प्रतिशत और साल 2013 में स्नातक में 62 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। काॅलेज की पढ़ाई के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गए थे। 11 साल में पांच बार सरकारी नौकरी लगे।

पवन कुमार की सरकारी नौकरी
- साल 2012 में भारतीय सेना में चपरासी
- साल 2013 में भारतीय रेलवे में गैंगमैन
- साल 2014 में पटवारी
- साल 2016 में ईओ/आरओ में चौथी रैंक
- साल 2023 में आरएएस में 170वीं रैंक

सात भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं पवन कुमार
पवन कुमार ने बताया कि वे सात भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। चार बहन व दो भाई हैं। किसान पिता ने दिहाड़ी मजदूरी भी की। जब पाचवीं कक्षा में थे तब से ही जीवन में संघर्ष करना सीख लिया था। स्कूल आने-जाने में किराए के दो रुपए बचाने के लिए 10 किलोमीटर पैदल जाया करते थे। छुट्टी के दिनों में गांव-ढाणियों में घूमकर सब्जी बेचना, ट्यूबवैल पर काम भी किया।

पढ़ाई बीच में छोड़ घर आए
कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई राजकीय माध्यमिक विद्यालय भीमड़ा से की। 9th और 10th की छुट्टियों में जोधपुर फैक्टरी में, कमठा मजदूरी भी की। 11वीं में जीएसएसएस बालोतरा में एडमिशन लिया और बीच में स्कूल छोड़कर आ गया। सोचा कि अब अहमदाबाद जाकर मजदूरी करूंगा। उसी समय एक दोस्त ने सलाह दी कि 12th ragular कर ले तो ज्यादा सही रहेगा।
मूर्तिकार जगदीश सिंह ने संवारी जिंदगी
पवन कुमार कहते हैं कि उनके जीवन में दशा और दिशा मूर्तिकार जगदीश सिंह ने बदली थी। आज वो इस दुनिया में नहीं, मगर उन्हीं की बदौलत पवन कुमार सक्सेस हो पाए। जगदीश सिंह ने उनको अपने साथ रखा। एक बेटे, भाई , मित्र से भी ज्यादा प्यार दिया। मेरे लिए मित्र, भाई, गुरु, मार्गदर्शक सबकुछ वो ही थे।
शादी के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
साल 2010 में 12 कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही पवन कुमार की शादी हो गई थी। तब परिवार की जिम्मेदारी,पड़ोसियों के ताने और पढ़ाई इन सब के बीच खुद को मॉटिवेट रख पाना आसान नहीं था। उस स्थिति में जगदीश सिंह ने हौसला बनाए रखा। वो खुद भी आरएएस की परीक्षा दिया करते थे। उन्हीं को देखकर पवन ने भी अफसर बनने की ठानी।

जब एक माह में छोड़ दी नौकरी
पवन कुमार का भारतीय सेना में मल्टी टास्किंग स्टाफ के पद पर चयन हुआ। एक माह में नौकरी छोड़कर आ गए और फिर 2013 में भारतीय रेलवे में गैंगमैन बनकर बनिया सांडा धौरा, बायतु में पोस्टिंग पाई। करीब 6 माह तक यह नौकरी की। उसी दौरान पवन की मां की एक किडनी खराब हो गई, जो निकलवानी पड़ी। मां जिंदा बच गई।
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