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Success story: BPL परिवार का बेटा शरण कांबले बना IPS, मां-बाप ने मजदूरी करके पढ़ाया, खुद ने बेचीं सब्जियां

IPS Sharan Kamble Biography in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पास करके भारतीय पुलिस सेवा (IPS) ज्‍वाइन करने वालों की सक्‍सेस स्‍टोरी लिखी जाए तो साल 2021 बैच के अफसरों में शरण गोपीनाथ कांबले की कहानी टॉपर बन सकती है।

राजस्‍थान कैडर के आईपीएस शरण कांबले सक्‍सेस स्‍टोरी में बेइंतहा मुफलिसी है। अनपढ़ मां-बाप का बड़ा ख्‍वाब है। हर कदम पर भाई का साथ है। खुद के बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत व कभी हार नहीं मानने वाली जिद और 20 लाख की नौकरी छोड़ पुलिस अफसर बनना भी है।

IPS Sharan Kambale Success story

सुबह चार बजे की बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई

राजस्‍थान पुलिस के युवा काबिल आईपीएस शरण कांबले इन दिनों सिंघम स्‍टाइल में काम करने को लेकर भी चर्चा में बने हुए हैं। अजमेर के पुष्‍कर एसएचओ पद पर कार्यरत शरण कांबले हाल ही सुबह चार बजे भेष बदलकर पुष्‍कर घाटी में बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंच गए थे।

IPS Sharan Kambale

IPS शरण कांबले का परिवार (IPS Sharan Kamble family)

आईपीएस शरण कांबले का जन्‍म 30 सितंबर 1993 को महाराष्‍ट्र के सोलापुर जिले की बारसी तहसील के गांव तड़वले में हुआ। शरण कांबले के पिता गोपीनाथ कांबले व मां सुदामती कांबले अनपढ़ थे, मगर शिक्षा की ताकत को बखूबी समझा और स्‍कूल-कॉलेज की ओर उठते बेटे शरण के कदम कभी नहीं रोके। आईपीएस शरण कांबले से दो बड़े भाई दादा साहेब कांबले ने उनका हर कदम पर साथ दिया। पढ़ाई का खर्च उठाया। भाई वर्तमान में पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं।

शरण कांबले के परिवार का संघर्ष (IPS Sharan Kamble Struggle )

गोपीनाथ व सुदामती ने अपने दो बच्‍चों को पढ़ाने के लिए खेतों में मजदूरी, ग्राम पंचायत के गटर साफ करने तक का काम किया। तब इनका परिवार बीपीएल श्रेणी में हुआ करता था। पक्‍का घर भी दो साल पहले ही बना है। बेटा शरण कांबले भी स्‍कूल की पढ़ाई से टाइम निकालकर गांव-गांव सब्‍जी बेचने जाया करता था। शरण ने 12वीं तक की पढ़ाई चिमनी की रोशनी में पढ़कर की।

IPS officer Sharan Kambale

शरण कांबले की पढाई

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में शरण कांबले ने बताया कि उन्‍होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्‍कूल से पूरी की। 11वीं व 12वीं की पढ़ाई 12 किलोमीटर दूर पड़ोस के गांव के स्‍कूल से की।

खास बात है कि स्‍कूल आने-जाने में बस में सफर करना पड़ता था। बस के अंदर बैठने का किराया 10 रुपए व ऊपर बैठने के 5 रुपए थे। गरीबी के कारण शरण धूप, आंधी व बारिश में बस की छत पर बैठकर ही सफर करते थे।

Sharan Kambale IPS

शरण कांबले ने छोड़ा 20 लाख का पैकेज

शरण कांबले कहते हैं कि 12वीं के बाद उन्‍हें वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सांगली महाराष्‍ट्र में दाखिला मिल गया था। फिर बेंगलुरु के आईआईएससी से पीजी की डिग्री ली।

पीजी करने के बाद 20 लाख की नौकरी का ऑफर मिला, जिसे उसी शाम यूपीएससी की तैयारी करने की वजह से ठुकराया दिया, क्‍योंकि शरण के पिता गोपीनाथ का ख्‍वाब था कि बेटा क्‍लास वन का अफसर बने।

स्‍कॉलरशिप से की UPSC की तैयारी

शरण कांबले को खुद पर इतना भरोसा था कि 20 लाख की नौकरी ठुकरा दी और दिल्‍ली जाकर यूपीएससी की तैयारी करने की ठानी, मगर राह में गरीबी रोड़ा बन गई। परिवार इतने पैसे की व्‍यवस्‍था नहीं कर पाया। ऐसे में शरण ने महाराष्‍ट्र की छात्रवृति योजना की परीक्षा दी, जिसे उत्‍तीर्ण कर आठ माह तक हर माह 12 हजार रुपए यूपीएससी की तैयारी के लिए पाए।

शरण गोपीनाथ कांबले की यूपीएससी रैंक

शरण कांबले ने लगातार तीन बार यूपीएससी पासा की। साल 2019 में UPSC सीएपीएफ में AIR 8, साल 2020 में UPSC की CSE में AIR 542 पाकर आईपीएस बने और यूपीएससी 2021 में AIR 127 हासिल की। तब इन्‍हें IFS सर्विस कैडर मिला, जिसकी बजाय इन्‍होंने आईपीएस को ही चुना।

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