अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: वैभव सूर्यवंशी से लेकर दिव्या देशमुख तक, वो 5 युवा जिन्होंने रचा इतिहास
International Youth Day 2025: भारत की युवा पीढ़ी हमेशा से सपनों को हकीकत में बदलने की ताकत रखती आई है। चाहे खेल का मैदान हो, नेतृत्व का मंच या आसमान की ऊँचाइयाँ। देश के कई युवा अपने साहस, मेहनत और जुनून से दुनिया भर में नई मिसाल कायम कर रहे हैं। इन्हीं में से पाँच चेहरे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में इतिहास रच दिया।
आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त 2025) के अवसर पर मिलिए आर्या राजेंद्रन की नेतृत्व क्षमता, वैभव सूर्यवंशी और दिव्या देशमुख की खेल प्रतिभा, तथा आयशा अजीज के आसमान छूते हौसलों जैसी प्रेरणादायी कहानियों से, जो आने वाली पीढ़ियों को राह दिखा रही हैं।

वैभव सूर्यवंशी: सबसे धांसू युवा बल्लेबाज
बिहार के समस्तीपुर जिले के गांव ताजपुर में 27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव सूर्यवंशी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। वैभव घरेलू क्रिकेट में बिहार और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं। 12 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण कर वैभव ने रणजी ट्रॉफी के सबसे युवा खिलाड़ियों में जगह बनाई। साल 2025 की आईपीएल नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें ₹1.1 करोड़ में खरीदा। भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
आर्या राजेंद्रन: सबसे कम उम्र की मेयर
केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम की सबसे कम उम्र की मेयर बनने का गौरव आर्या राजेंद्रन को हासिल हुआ। आर्या ने महज 21 साल की उम्र में मेयर की कुर्सी संभाली। आर्या राजेंद्र बाल संगम की राज्य अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
आर्या राजेंद्रन केरल के मडवन्मुगल वार्ड से सीपीआई (एम) की पार्षद चुनी गई थीं और फिर मेयर बनने में भी सफल रहीं। इलेक्ट्रिशियन पिता राजेंद्र व एलआईसी एजेंट मां श्रीलथा ने बेटी आर्या के मेयर बनने को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।
आयशा अजीज: युवा महिला पायलट
आसमान में बुलंद हौसलों की ऊंची उड़ान भरने वालीं आयशा अजीज भारत की सबसे युवा महिला पायलट हैं। मुंम्बई में पली-बढ़ी आयशा साल 2011 में महज 15 साल की उम्र में उस वक्त चर्चा में आई थीं, जब वह लाइसेंस प्राप्त करने वालीं भारत की सबसे कम उम्र की स्टूडेंट पायलट बनी थीं।
साल 2017 में स्नातक करने के बाद आयशा अजीज को कमर्शियल उड़ान के लाइसेंस मिला। साल 2018 में आयशा को राजभवन में फर्स्ट लेडी का सम्मान मिला। उन्हें रूस से सोकोल एयरबेस से मिग-29 की ट्रेनिंग का भी अवसर मिला।
दिव्या देशमुख: शतरंज में युवा चैंपियन
नागपुर की 19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने एफआईडीई महिला चेस वर्ल्ड कप 2025 जीतकर इतिहास रच दिया। वह यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। फाइनल में उन्होंने बाकू में हुए ऑल-इंडियन मुकाबले में कोनेरू हम्पी को रैपिड टाई-ब्रेक में 1.5-0.5 से हराया। इस जीत के साथ दिव्या भारत की चौथी महिला ग्रैंडमास्टर और देश की 88वीं ग्रैंडमास्टर बनीं।
वह एफआईडीई महिला रैंकिंग में क्लासिकल में 18वें, रैपिड में 22वें और ब्लिट्ज में 18वें स्थान पर हैं। 2024 में उन्होंने विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीती और शतरंज ओलंपियाड में भारत के स्वर्ण पदक में अहम योगदान दिया। फाइनल में वह अंडरडॉग थीं, लेकिन दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन और विश्व नंबर-5 को हराकर उन्होंने अपनी गिनती दुनिया के उभरते सितारों में दर्ज कराई।
गुकेश डोम्माराजू: 18 की उम्र में ग्रैंडमास्टर
डोम्माराजू गुकेश का जन्म 7 मई 2006 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ। डॉक्टर पिता और माइक्रोबायोलॉजिस्ट मां के बेटे गुकेश ने 7 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। गुकेश ने 18 वर्ष की उम्र में सिंगापुर में एफआईडीई विश्व शतरंज चैंपियनशिप 2025 जीतकर नया कीर्तिमान बनाया। फाइनल में उन्होंने चीन के डिफेंडिंग चैंपियन डिंग लिरेन को 7.5-6.5 से हराया और दुनिया के सबसे कम उम्र में यह खिताब जीतने वाले खिलाड़ी बन गए।
यह रिकॉर्ड पहले 1985 में गैरी कैस्परोव के नाम था, जिन्होंने 22 वर्ष की उम्र में खिताब जीता था। 25 नवंबर से 11 दिसंबर तक चले फाइनल में 13 गेम के बाद स्कोर 6.5-6.5 से बराबरी पर था, लेकिन 14वें गेम में जीतकर गुकेश ने खिताब अपने नाम किया। यह एफआईडीई के 138 साल के इतिहास में पहला मौका था जब फाइनल में एशिया के दो खिलाड़ी आमने-सामने थे।












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