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Teachers Day: कांस्‍टेबल धर्मवीर जाखड़ बना 'शिक्षक', भीख मांगने वाले हाथों में कटोरे की जगह थमाई कलम

Aapni Pathshala Churu: आज शिक्षक दिवस के मौके पर राजस्‍थान पुलिस कांस्‍टेबल धर्मवीर जाखड़ की कहानी जानिए जो झुग्‍गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्‍चों के लिए चूरू में आपणी पाठशाला का संचालन कर रहे हैं।

Dharamveer Jakhar Aapni Pathshala Churu constable: शिक्षक किसी भी रूप में हो सकता है। उसका मकसद सिर्फ शिक्षा देकर बच्‍चे को बेहतरीन भविष्‍य की ओर बढ़ाना है। ऐसे ही शिक्षक हैं धर्मवीर जाखड़। वैसे तो ये पुलिस कांस्‍टेबल हैं, मगर झुग्‍गी-झोपड़ी में रहने वालों बच्‍चों के लिए शिक्षक की भी भूमिका निभा रहे हैं।

शिक्षक दिवस के मौके पर जानिए धर्मवीर जाखड़ की पूरी कहानी, जो राजस्‍थान पुलिस में कांस्‍टेबल हैं। चूरू पुलिस लाइन में पोस्‍टेड हैं और बीते पांच साल से भीख मांगने वाले हाथों में कटोरे की जगह कलम थमा रहे हैं।

Teachers Day 2023 special story

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में धर्मवीर जाखड़ कहते हैं कि चूरू जिला मुख्‍यालय पर झुग्‍गी-झोपड़ियों के चंद बच्‍चों से शुरू हुई आपणी पाठशाला में आज नामांकन 250 तक पहुंच गया। यहां पढ़ने वाले सभी बच्‍चे झुग्‍गी-झोपड़ियों से हैं।

चूरू जिले के राजगढ़ उपखंढ में गांव खारियाबास के रहने वाले धर्मवीर जाखड़ साल 2011 में राजस्‍थान पुलिस में बतौर कांस्‍टेबल भर्ती हुए। चूरू महिला पुलिस थाने में तैनानी के दौरान जनवरी 2016 से विचार आया कि क्‍यों ना इस साल कुछ नया किया जाए?

इसी सोच के साथ चूरू रेलवे व कलेक्‍ट्रेट के आस-पास झुग्‍गी-झोपड़ियों में पहुंचे। पता चला कि यहां का हर बच्‍चा मजबूरी में भीख मांगने को मजबूर है। किसी ने स्‍कूल में कभी कदम नहीं रखा। शहरवासियों की मदद से बच्‍चों के लिए भोजन व कपड़ों की व्‍यवस्‍था की और उन्‍हें किताब-कॉपी भी दिलवाई।

Teachers Day 2023 special story

कुछ इस तरह से सात साल पहले झुग्‍गी-झोपड़ियों में जाकर कांस्‍टेबल व उनके साथी बच्‍चों को पढ़ाना शुरू किया। देखते ही देखते बाकी बच्‍चों का भी उत्‍साह बढ़ा। बच्‍चों की संख्‍या अधिक होने पर पुलिस लाइन चूरू परिसर में आपणी पाठशाला के नाम से स्‍कूल का संचालन करने लगे। साथ-साथ पुलिस की जिम्‍मेदारी भी निभाते रहे।

Dharamveer Jakhar and Aapni Pathshala

धर्मवीर जाखड़ कहते हैं कि उनकी और शहर के लोगों की मेहनत अब रंग लाती दिख रही है। जन सहयोग से आपणी पाठशाला के लिए डेढ़ करोड़ एकत्रित किए गए। उनसे चूरू जिला मुख्‍यालय की देपालसर रोड पर डेढ़ बीघा जमीन खरीदकर उसमें आपणी पाठशाला का भवन बनाया जा रहा है। दो मंजिला इस इमारत में दर्जनों कमरे होंगे। दसवीं तक के बच्‍चे यहां पढ़ सकेंगे।

धर्मवीर जाखड़ के प्रयासों का नतीजा यह है कि चूरू जिला मुख्‍यालय के पांच किलोमीटर के दायरे में अब कोई झुग्‍गी-झोपड़ी ऐसी नहीं जहां के बच्‍चे पढ़ते नहीं हो। भवन बनकर तैयार होने के बाद इसमें अन्‍य जिलों के भी झुग्‍गी-झोपड़ियों के बच्‍चों को आवासीय सुविधा निशुल्‍क उपलब्‍ध करवाई जाएगी। वे भी यहां आकर पढ़ सकेंगे।

धर्मवीर जाखड़ कहते हैं कि पहले मैं अकेला पढ़ाता था। अब जन सहयोग से आठ शिक्षक लगा रखे हैं। आपणी पाठशाला से प्रारम्भिक शिक्षा पाकर निकले करीब 40 बच्‍चे तो जोधपुर में उत्‍कर्ष के छात्रावास गुरुकुल में निशुल्‍क पढ़ रहे हैं। पांच छात्राएं यहां चूरू में सरकारी आवासीय छात्रावास में रहकर नौवीं की पढ़ाई कर रही हैं।

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