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BR Ambedkar: जब संविधान निर्माता ने 75 साल पहले महिला डॉक्टर को किया 'प्रपोज'! शादी तक कैसे पहुंची बात, जानिए

BR Ambedkar संविधान निर्माता और कानूनविद होने के साथ एक कोमल दिल वाले शख्स की पहचान भी रखते हैं। 14 अप्रैल को अबंडेकर जयंती से पहले कुछ रोचक बातें जानिए। पहली कड़ी में अंबेडकर के 'लव वेटर' के बारे में जानिए।

BR Ambedkar

BR Ambedkar का जीवनकाल और उनके लाइफ की कितनी ही घटनाएं हैं, जिनसे दशकों बाद भी आज की संघर्ष करने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार करने का श्रेय अंबेडकर को दिया जाता है।

अंबेडकर के सीने में भी दिल

हालांकि, क्या आप जानते हैं कि कानून की पेचीदा बातों को कलमबद्ध करने वाली इस हस्ती के सीने में कोमल दिल भी था। जी हां, अंबेडकर की पत्नी सविता अंबेडकर की किताब में कुछ रोचक प्रसंगों का जिक्र है।

साड़ी पहनने से नाराज हुए भीमराव

पति-पत्नी के बीच खट्टी-मीठी बातों वाले एक प्रसंग का जिक्र कर सविता बताती हैं कि अंबेडकर ने एक दिन उनसे साथ में संसद चलने को कहा। वे भी राजी हो गईं। हालांकि, जब वे साड़ी पहनकर अंबेडकर के सामने पहुंचीं, तो वे खफा हो गए।

भीमराव को मनाना भी जानती थीं पत्नी

बकौल सविता, साड़ी को लेकर नाराजगी का इजहार किया। अंबेडकर ने उनसे कहा कि संसद आने की कोई जरूरत नहीं और वे अकेले चले गए। उन्हें नाराजगी की जड़ का एहसास हुआ। सविता साड़ी को लेकर नाराजगी का इजहार करने वाले भीमराव को मनाना भी जानती थीं।

संसद की गैलरी में भीमराव की पत्नी

उन्होंने अंबेडकर के ड्राइवर को संकेत किया कि साहब को संसद छोड़कर लौट आना, क्योंकि उन्हें भी संसद जाना है। अंबेडकर को संसद छोड़ने के बाद ड्राइवर सविता को लेने वापस आता है और वे संसद की गैलरी में जाकर नियत स्थान पर बैठ गईं।

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अंबेडकर की नाराजगी दूर

जब संसद में अंबेडकर अपने वक्तव्य के लिए खड़े हुए तो उनकी नजरें ऊपर वाली गैलरी पर गई। पत्नी सविता को देखने के बाद अंबेडकर ठिठक गए। सविता उनकी पसंद वाली साड़ी पहनकर संसद पहुंची थीं। इतना देखते ही अंबेडकर की नाराजगी दूर हो गई।

75 साल पहले का लेटर

बकौल सविता, शादी से पहले 12 मार्च 1948 को अंबेडकर ने उन्हें एक लेटर लिखा था। इसमें अंबेडकर सविता से कहते हैं कि स्टेशन नहीं आने का फैसला लेकर उन्होंने अच्छा किया। सविता के इमोशनल बैलेंस की सराहना करते हुए अंबेडकर ने खुद को बेहद कमजोर, नाजुक और भावुकता से भरा व्यक्ति बताते हैं।

अंबेडकर की धारणा- खड़ूस मानते हैं लोग

सविता ने किताब में जो बातें लिखी हैं, इसके अनुसार अंबेडकर लिखते हैं कि आम लोगों की धारणा उनके बारे में ठीक नहीं है। उन्हें कठोर दिल वाले, सख्त मिजाज, खड़ूस और खरी बातें कहने वाला आदमी माना जाता है।

कोमल और नजाकत से भरी शख्सियत

बकौल सविता अंबेडकर लिखते हैं कि तार्किक होने के कारण उन्हें केवल दिमाग का इस्तेमाल करने वाला माना गया। ऐसा आदमी जिसके पास शायद दिल है ही नहीं। हालांकि, अंबेडकर खुद को कोमल और नजाकत से भरी शख्सियत बताते हैं।

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आंसू छलकने पर उन्हें कमजोर दिल वाला न मानें

सविता को लिखे इस लेटर में अंबेडकर कहते हैं कि कोमलता के कारण भले ही थोड़ी कमजोरी आती है, लेकिन आशा है, आंखों से आंसू छलकने पर उन्हें कमजोर दिल का आदमी नहीं समझा जाएगा।

मराठी से अंग्रेजी में ट्रांसलेट हुई आत्मकथा

डॉ शारदा कबीर का नाम शादी के बाद सविता अंबेडकर हो गया। इन्हें माई साहेब भी कहा जाता है। डॉ. आंबेडकरांच्या सहवासात टाइटल से आई इस किताब को अंग्रेजी में नदीम खान ने ट्रांसलेट किया है।

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    86 साल पहले महिला डॉक्टर!

    किताब में वे बताती हैं कि वे सारस्वत ब्राह्मण परिवार से आती हैं और 1937 में एमबीबीएस का कोर्स पूरा करने के बाद एमडी की डिग्री पाने के बाद प्रोफेशनल डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन खराब तबीयत के कारण सपना टूट गया।

    अंबेडकर और नागपुर का धर्म परिवर्तन

    महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले से आने वाली सविता अंबेडकर की सेहत के बारे में कई बातें शेयर की हैं। बकौल माई साहेब, 1953 में दिल का दौरा आने के बाद अंबेडकर का शरीर काफी कमजोर हो गया था। नागपुर की धर्म परिवर्तन सभा के बारे में उन्होंने काफी प्रोत्साहित किया, जिसके बाद ही वो ऐतिहासिल घटना हुई।

    पहली मुलाकात कैसे हुई

    1947 में बाबा साहेब से पहली मुलाकात के बारे में माई साहेब बताती हैं कि एक कॉमन दोस्त के यहां पहली बार मुलाकात हुई थी। विदेशी बाबा साहेब को जर्मन राजकुमार कहते थे। दोस्त के यहां पहली बार मुलाकात के बाद महिला के डॉक्टर बनने पर भीमराव ने बधाई दी।

    शादी तक कैसे पहुंची बात

    शादी तक बात कैसे पहुंची, ये जानना भी बेहद दिलचस्प है। सविता की किताब के अनुसार भीमराव डॉ मालवंकर से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद भीमराव ने कहा कि उन्होंने सविता को घर छोड़ने का ऑफर दिया।

    लाखों लोगों के लिए जीने की इच्छा

    देखो डॉक्टर मेरे दोस्त शादी का दबाव बना रहे हैं, लेकिन काबिल साथी को तलाशना काफी मुश्किल हो रहा है। अंबेडकर कहते हैं कि उन्हें लाखों लोगों के लिए जीवित रहना होगा, ऐसे में सही होगा कि लोगों की सलाह पर गंभीरता से विचार करूं।

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    जीवनसाथी की तलाश

    डॉ सविता ने जवाब दिया कि कोई ऐसा जरूर होना चाहिए जो आपका ख्याल रख सके। अंबेडकर ने जवाब दिया कि आपके साथ ही अपने लिए सही साथी की तलाश शुरू करता हूं।

    बुरा या अपमानित नहीं महसूस करता

    अंबेडकर सविता से उम्र के अंतराल पर भी मुखरता से बात करते हैं। उन्होंने कहा, खराब सेहत और आयु के अंतर के कारण अगर मेरे प्रस्ताव को खारिज भी करती हो तो बुरा या अपमानित नहीं लगेगा। सोचकर जवाब देना।

    शादी के लिए क्यों राजी हुईं माई साहेब

    सविता ने भीमराव को लेटर लिखने के बाद जवाब दिया। इसका एकमात्र कारण था उनकी सेहत में सुधार का संकल्प। तबीयत में सुधार का मकसद भारत का संविधान बेहतर तरीके से लिखना था।

    साड़ियों की पसंद लाजवाब

    "बाबासाहेब: माई लाइफ विद डॉ अंबेडकर" किताब मराठी ओरिजनल- (डॉ. आंबेडकरांच्या सहवासात) में सविता अंबेडकर ने शादी से लेकर उनके जीवन के दिलचस्प पहलुओं तक की अनकही कहानियों पर चर्चा की है। किताब में सविता बताती हैं कि उनकी साड़ियों के बारे में बाबा साहेब की पसंद कमाल की थी।

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