Aanchal Saini: एक IDEA ने बदली किस्मत, चमचमाते करियर को छोड़ शुरू किया Startup, करती हैं करोड़ों की कमाई

Flyrobe Chief Executive Officer Aanchal Saini Interview (Oneindia Exclusive): आंचल सैनी ने फैशन इंडस्ट्री में बेहद कम समय में बड़ा नाम कमाया है। आंचल दिल्ली के ज्ञान भारती स्कूल से पढ़ी हुई हैं। इसके बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और सात साल तक दिल्ली हाई कोर्ट में काम भी किया। आंचल अपने पिता की इकलौती बेटी हैं। आंचल के पिता भी वकील हैं। आंचल के मुताबिक उनके बिजनेस को बढ़ाने में परिवार का सपोर्ट रहा है। आंचल के पति जसप्रीत सिंह गुजराल हैं जो टेक्नोलोजी इंडस्ट्री में लंबे समय से काम कर रहे हैं। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आंचल सैनी ने आखिर कैसे खुद को फैशन रेंटल इंडस्ट्री में इतना कामयाब बनाया है। वनइंडिया से बातचीत के दौरान आंचल सैनी द्वारा कही गई बातें नीचे पढ़ी जा सकती है.....

फ्लाईरोब का मतलब क्या है और आपने अपनी कंपनी का नाम यही क्यों रखा?

जब हमने इसकी शुरुआत की थी तो हमारी सोच यही थी कि जैसे डोमिनोज का पिज़्ज़ा आपके घर में आधे घंटे में आ जाता है वैसे ही ड्रेस भी आपके पास उड़कर जल्द से जल्द आ जाये। इसलिए इसका नाम फ्लाईरोब रखा गया था। जैसे कि आपको शाम में किसी पार्टी में जाना है तो आपके घर पहुंचने से पहले ही यह ड्रेस आपके पास पहुंच जाएगा और आप फिर इसे पार्टी में पहन सकते हैं। अगले दिन वह वापस हो जाएगा और आपको इसके एमआरपी से 10 से 15 प्रतिशत ही पेय करना होगा। अगर कोई ड्रेस 5000 का है तो आपका काम 400-500 में हो जायेगा, ये सोचकर हमने इस काम को शुरू किया था।

Aanchal Saini 1

फ्लाईरोब की स्थापना कब हुई थी? शुरुआत के समय आपने इस पर कितना निवेश किया था? मौजूदा टर्नओवर क्या है?

फ्लाईरोब की शुरुआत साल 2015 में की गई थी। आंचल सैनी के मुताबिक उन्होंने शुरुआत में इस कंपनी में अपने दो करोड़ रुपये निवेश किए थे। फ्लाईरोब ब्रांड में अब तक 80 करोड़ रुपये जा चुके हैं। आज से 9 साल अधिकतर लोग कपड़े रेंट पर नहीं लेते थे बल्कि खरीदते थे। फ्लाईरोब साल 2024 में 15 करोड़ रुपये का मुनाफा करने की ओर अग्रसर है। हमने जैसे-जैसे अपने काम को आगे बढ़ाया तो हमें पता चला कि मार्केट में वेस्टर्न ड्रेस से ज्यादा एथनिक ड्रेस की मांग है। लेकिन एथनिक ड्रेस तो लोग पहले से ही प्लान करके रखते हैं।

वेडिंग बेल्स और जरीवाला जैसी कंपनियां भी रेंट पर कपड़े देने का काम करती हैं तो फ्लाईरोब किन मामलों में इनसे अलग है?

जब हमने काम शुरू किया था तभी इस तरह की दुकाने होती थी जो रेंट पर कपड़े देती थी। लेकिन लोग इतना रेंटल पर कपड़े नहीं लेते थे। इसके दो प्रमुख कारण थे एक तो ज्यादातर जिडाइन के कपड़े रेंट के लिए मार्केट में उपलब्ध नहीं थे। दूसरी चीज लोगों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं थी तो हमने टेक्नोलॉजी के सहारे फ्लाईरोब का विस्तार किया और हाइजीन का पूरा ध्यान रखा। हमारे यहां से कपड़े रेंट पर लेने के लिए एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा लोग स्टोर पर आकर भी कपड़े रेंट पर ले सकते हैं। एक दिन के 30-40 ऑर्डर स्टोर से दिया जा सकता है, लेकिन 400-500 ऑर्डर को पूरा करने के लिए एप बेस्ट ऑप्शन रहा है।

आपके जीवन में वह सबसे बड़ा फैक्टर क्या है जिसने आपको सफलता पाने में मदद की?

हमारा पहला फ्रेंचाइज स्टोर खुला था तो कोविड आ गया हम काफी मुश्किलों में थे, मन में कई तरह के सवाल आ रहे थे। बिजनेस में नुकसान हो रहा था, हमने पहला फ्रेंचाइज स्टोर खोला, आगे 9 और स्टोर खुलने वाले थे तभी कोविड ने दस्तक दे दी। हम वेडिंग रिलेटेड रेंटनल बिजनेस करते थे ऐसे में कोविड में हम जीरो पर आ गए थे। हमारे साथ 150 लोग काम करते थे, लेकिन हम इन सबसे पीछे आकर दोबारा शून्य पर आ गए थे। कोविड के दौरान लोगों ने अपने घर में बहुत समय बिताया फिर लोगों ने पैसे बचाने के ऊपर फोकस किया। इसके बाद काफी लोगों का माइंडसेट चेंज हुआ। कोविड के बाद जो हमने वापस से शुरू किया और 0 से 20 स्टोर बनाया यह हमारे लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट रहा। मौजूदा समय में हमारे अलग-अलग स्टेट में 20 स्टोर है। दिल्ली में रजौरी गार्डन और गुरुग्राम में दो स्टोर है।

फ्लाईरोब में अभी टोटोल कितने लोग काम करते हैं? उनकी भूमिका क्या होती है?

फ्लाईरोब में मौजूदा समय में करीब 100 लोग काम करते हैं। उनकी भूमिका अलग-अलग होती है। रिटेल की टीम अलग है। वेयर हाउस की टीम जो कपड़ों का पूरा काम देखती है। एक सोशल मीडिया टीम है जो सोशल मीडिया हेंडल करती है। टेक्नॉलोजी की एक अलग टीम है जो टेक डेवलपमेंट देखने का काम करती है।

आप पेशे से एक वकील रही हैं, आपने दिल्ली हाई कोर्ट में काम भी किया है तो ऐसे में इस नए बिजनेस को शुरू करते समय आपके सामने किस तरह की चुनौतिया थी?

फ्लाईरोब शुरू करने से पहले हमने फूड रिलेटेड बिजनेस शुरू किया था। लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं चला था। उस दौरान मैं पार्ट टाइम काम करती थीं। लेकिन मुझे तब समझ आया कि कोई भी काम करने के लिए हमने अपना पूरा समय उस में देना होगा। मैंने लगभग 7 साल दिल्ली हाई कोर्ट में काम किया था। मुझे दिल्ली के एक बडे़ लॉ फॉर्म से जॉब ऑफर भी मिला था। लेकिन मैं क्लियर थी कि मुझे अब रेंटल बिजनेस ही करना है।

मौजूदा समय में फैशन रेंटल इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रहा है, आपकी इस पर क्या राय है?

1.85 ट्रिलियन एथनिक इंडस्ट्री है, जिस तरीके शादियों का कॉनस्पेट चेंज हो रहा है। एक शादी का मतलब तीन-चार फंक्शन हैं। युवा में अवेयरनेस है और लोगों को पता है उन्हें क्या पहनना है। ऐसे में वह रेंट पर कपड़ों को लेने का काम करते हैं। मुझे यह मार्केट तेजी से बढ़ती दिख रही है। जैसे ओला-ऊबर है, उन्हें लंबा समय लगा लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने में उस मुकाबले में रेंटल इंडस्ट्री तेजी से ग्रोथ की ओर बढ़ रही है।

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