Aadi Mahotsav में पहुंचीं सीताबेन की यात्रा प्रेरक है, खेतों की मजदूरी से बिजनेसवुमन तक का सफर जानिए

सीताबेन की पहचान गुजरात की एक साहसी आदिवासी महिला की है। इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में दिल्ली में आयोजित आदि महोत्सव में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

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Aadi Mahotsav एक ऐसा मंच है जहां देश के आदिवासी अपनी प्रतिभा का परिचय दे सकते हैं। गुजरात के एक प्रेरक आदिवासी उद्यमी ने दिखाया है कि सही प्रयास और समर्पण के साथ सबकुछ हासिल किया जा सकता है। सीताबेन की पहचान गुजरात की एक साहसी आदिवासी महिला की है। इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मेजर ध्यानन चंद नेशनल स्टेडियम में अपना व्यवसायिक कौशल प्रदर्शित किया।

सीताबेन ने साबित कर दिया कि सफल होने के लिए कठिन परिश्रम और समर्पण जरूरी है। औपचारिक शिक्षा एक सीमा के बाद बेमानी हो जाती है। वाजिरभाई कोचहादिया भी एक प्रेरक उदाहरण हैं। कैसे ग्रामीण गुजराती कौशल, दृढ़ता और समर्पण के साथ सफलता प्राप्त कर रहे हैं, जानिए इस कहानी में।

सीताबेन की सक्सेस पर न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया, गुजरात के डांग जिले में सपुतारा में रहती हैं। उन्होंने कहा, खेत में मजदूर के रूप में काम करती थीं। शराबी पति सहित पांच सदस्यों वाली फैमिली की देखभाल करने की जिम्मेदारी थी। कुछ दिनों के बाद पति निधन हो गया। जीवन के इस पड़ाव से सीताबेन की उद्यमी बनने की यात्रा पेचीदा और प्रेरक दोनों है। उन्होंने मिलेट ईयर में बाजरे के बिस्कुट, चकरी, पापड़ और अन्य उत्पाद बनाकर व्यवसायिक महिला के रूप में अपनी यात्रा शुरू की है।

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सीताबेन के उत्पादों को अच्छा बाजार भी मिला। उनके उत्पाद अब गुजरात के अलावा पूरे भारत में बेचे जाते हैं। 16 फरवरी से 27 फरवरी, 2023 तक चलने वाले आदी महोत्सव में सीताबेन ने अपने बाजरा बिस्कुट को भावुक रूप से प्रदर्शित किया। उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उनका माल सिर्फ पहले दो दिनों में बिक गया। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके उत्पादों को पसंद किया।

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    सीताबेन उन उद्यमियों में से एक थीं, जिन्हें आदी महोत्सव के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी से मिलने का मौका मिला। सीताबेन ने प्रधनमंत्री के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा - "मैंने उससे कहा कि मेरे दोस्त पूछेंगे कि मैं दिल्ली में किससे मिली? इस पर प्रधानमंत्री मुस्कुराए और सीताबेन के साथ एक तस्वीर क्लिक कराई।"

    अपने छोटे व्यवसाय के बारे में बात करते हुए, सीताबेन ने कहा, अब एक महीने में परिवार की देखभाल करते हुए 15,000 से 20,000 रुपये तक कमाने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि वे Dangi Adivasi Mahila Khedut Utpadak Producer Company Ltd में निदेशक मंडल की सदस्य के तौर पर जुड़ी हैं।

    योग्यता, हिम्मत और दृढ़ संकल्प का एक और उदाहरण वाजिरभाई कोचहेडिया हैं। भरूच जिले के हठकुंड गांव में रहने वाले वाजिरभाई बताती हैं कि विभिन्न प्रकार के बांस के सामान बनाती हैं। पूरे निर्माण के रूप में उनका परिवार भी मदद करता है। बांस के फर्निचर के बारे में मार्केटिंग उन्होंने बताया कि 2019 में 2 लाख रुपये से अधिक मूल्य के बांस के सामान बेचने में सफल रहे थे।

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    वाजिरभाई याद करते हैं, Gujarat Vans Kala Udhyog की मदद से अमेरिकी ग्रामीणों को प्रशिक्षित करने के लिए, हम अब पूरे भारत में अपने उत्पाद को बेचने और बनाने में सक्षम हैं। बता दें कि गुजरात के डांग और भरूच के जिलों के ये दो व्यवसायी छोटे आदिवासी उद्यमिता के कई सफल उदाहरणों में से एक हैं।

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