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Vitamin Deficiency: चुपचाप फैल रही बीमारी! इस विटामिन की कमी से जूझ रहे हैं भारतीय, हड्डियों से दिल तक को खतरा

Vitamin Deficiency: भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (ICRIER) ने हाल में एक रिपोर्ट जारी किया है। जिसमें भारत में तेजी से बढ़ती विटामिन D की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में इसे एक मूक महामारी बताया गया है। वहीं इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बढ़ रहे खतरा को भी चिन्हिंत किया है।

ICRIER ने अपने इस रिपोर्ट में इसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय अभियान, मूल्य नियंत्रण, खाद्य फोर्टिफिकेशन और बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाओं की सिफारिश की है।

Vitamin Deficiency

हर पांचवां भारतीय इसकी चपेट में

Road map to Address Vitamin D Deficiency in India नामक इस रिपोर्ट के मुताबिक, विटामिन D की कमी हर उम्र और वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है। बच्चों से लेकर डॉक्टरों और आउटडोर वर्कर्स तक इसके चपेट में है। रिपोर्ट में जो दावा किया गया है वो चिंता बढ़ाने वाली है।

  • 0-10 साल के बच्चों में 46% को रिकेट्स की समस्या
  • 80-90% बुजुर्गों में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा, जिससे फ्रैक्चर और स्थायी विकलांगता की संभावना बढ़ जाती है।

पूर्वी भारत सबसे अधिक प्रभावित

ICRIER के इस रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भारत में लगभग 39% आबादी विटामिन D की गंभीर कमी से जूझ रही है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • शहरी जीवन शैली और प्रदूषण- घनी आबादी और घरों के अजीबोगरीब स्ट्रक्चर की वजह से सूर्य की किरणें लोगों के शरीर तक पहुंच पा रही है।
  • इनडोर काम- आज के समय में लोग इनडोर काम ज्यादा कर रहे हैं। जिस वजह से धूप से दूरी बनी रहती है।
  • खानपान में कमी- खासकर शाकाहारी और लैक्टोज इनटॉलरेंट लोगों में अंडा, मछली और डेयरी उत्पादों की कम खपत

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हड्डियों से परे, कई गंभीर प्रभाव

विटामिन D की कमी की वजह से थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, डिप्रेशन, हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और ब्रेस्ट व प्रोस्टेट कैंसर जैसे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर के लिए जरूरी है।

जांच और सप्लीमेंट्स महंगे

  • विटामिन D की जांच की कीमत ₹1500 से अधिक है
  • विटामिन डी की गोलियों की कीमत 10 टैबलेट के लिए ₹48 से ₹130 तक होती है। यानी एक बार के कोर्स के लिए भी लोगों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
  • D3 (जानवर आधारित) दवा की कीमत पर नियंत्रण है, लेकिन D2 (पौधों से बनी) दवा अनियंत्रित और महंगी है

रिपोर्ट में ICRIER की प्रमुख सिफारिशें

  • विटामिन D सप्लीमेंट्स पर GST कम किया जाए
  • टेस्टिंग किट और सप्लीमेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की जाए
  • D2 और D3 दोनों फॉर्मूलेशन को प्राइस रेगुलेशन के दायरे में लाया जाए
  • कम लागत वाले टेस्टिंग किट्स के लिए घरेलू R&D को बढ़ावा मिले
  • दूध और तेल के अलावा गेहूं व चावल जैसे स्टेपल फूड्स को भी फोर्टिफाइड किया जाए
  • विटामिन D टेस्टिंग को 'एनीमिया मुक्त भारत' जैसी योजनाओं में शामिल किया जाए
  • PM पोषण योजना में फोर्टिफाइड अंडे और दूध को शामिल किया जाए

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'विटामिन D कुपोषण मुक्त भारत' कैंपेन की जरूरत

रिपोर्ट के सह-लेखक और Aakash Healthcare के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चौधरी ने Times of India को बताया कि अगर इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी बोझ बन सकता है और राष्ट्रीय उत्पादकता पर असर डालेगा।

ICRIER का सुझाव

ICRIER ने सुझाव दिया है कि सरकार को स्कूली शिक्षा, मीडिया और सामुदायिक प्रयासों के ज़रिए एक व्यापक विटामिन D कुपोषण मुक्त भारत अभियान चलाना चाहिए, खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को लक्षित करते हुए इस पर जोर देने की जरूरत है।

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