बड़ा दिलचस्प है अल्फांसो आम का इतिहास, जानें कहां से मंगवाया और क्यों पड़ा ये खास नाम...
Alphonso Mango: अल्फांसो एक ऐसा आम है, जो सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसे विदेशी आम कहा जाए तो कुछ भी गलत नहीं होगा। क्योंकि ये आया ही विदेश से है। इस आम के पीछे का इतिहास तकरीबन 500 साल पुराना है। इस आम को सिर्फ अल्फांसो ही नहीं बल्कि हापुस या फिर हाफूस भी कहा जाता है। इस आम का नाम अल्फांसो कैसे पड़ा, चलिये जानते हैं....
अल्फांसो आम की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये पकने के बाद एक हफ्ते तक बिल्कुल भी खराब नहीं होता है। यही कारण है कि इसे एक्सपोर्ट करना काफी आसान हो जाता है। दर्जनों के हिसाब से ये आम बिकता है। मगर ये बहुत महंगा होता है। इस आम की कीमत 1200 से लेकर 2000 रुपये तक की हो सकती है।

देश का एक राज्य ऐसा है, जहां इस आम की सबसे ज्यादा और अच्छी खासी पैदावार होती है। ये राज्य है महाराष्ट्र। राज्य के रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के आसपास के इलाकों में ये आम पाया जाता है।
अल्फांसो के नाम के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है। ये तो अंग्रेजी नाम है, जिससे इसे पुकारा जाता है। मगर ये 15वीं सदी की बात है, जब गोवा में पुर्तगालियों का राज था। पुर्तगाल के वायरस का नाम अल्फोंसो डी अल्बुकर्क था। उन्हें बागवानी का काफी शौक था। ऐसे में अपने इसी शौक के चलते उन्होंने एक खास आम का पौधा मंगवाया और इसे यहां लगा लिया।
ऐसे में इसके कई पौधे समय बीतने के साथ लगाए गए और स्थानीय आम के बगीचे लगाए गए। आम काफी स्वादिष्ट थे तो देखते ही देखते ये लोगों को खूब पसंद आने लगे। इसके बाद अल्फोंसो का निधन हो गया। ऐसे में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इस आम का नाम अल्फांसो रख दिया गया।












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