संता और मुर्गी

संता रोटी का एक टुकड़ा खुद खा रहा था और दूसरा एक पास बैठी मुर्गी को खिला रहा था।
बंता: ये क्या कर रहे हो?
संता: चिकेन के साथ रोटी खा रहा हूँ, नवरात्रे चल रहे है न।
संता बंता पानी पीने गए तो गलास उल्टा पड़ा था।
बंता: इसका तो मुँह ही बंद है।
संता: यह तो नीचे से भी टुटा हुआ है।
संता ने अमरुद लिये तो उनमे कीड़ा निकला।
संता: इसमें तो कीड़ा निकला है।
अमरुदवाला: ये किस्मत की बात है क्या पता अगली बार मोटर साईकिल निकल जाए।












Click it and Unblock the Notifications