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SSC: बर्खास्त कॉन्स्टेबलों के लिए खुशखबरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए बहाली के आदेश

By Rajeevkumar Singh
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    इलाहाबाद। अंगूठे के निशान व हस्ताक्षर मैच न करने पर बर्खास्त किए गए केंद्रीय बलों के कॉन्स्टेबलों के लिए बड़ी खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे बर्खास्त कॉन्स्टेबलों को बड़ी राहत दी है और कर्मचारी चयन आयोग के बर्खास्तगी वाले फैसले को रद्द कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग के फैसले को नैसर्गिक न्याय के विपरीत माना है और उनकी बहाली का आदेश दिया है। गौरतलब है कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा इलाहाबाद परिक्षेत्र में केंद्रीय बलों के लिए चयनित कांस्टेबलों के अंगूठे के निशान व हस्ताक्षर मैच ना करने पर बर्खास्तगी का आदेश जारी किया था। जिसे कांस्टेबलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज किया और अब हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है ।

    Allahabad High court nod for joining of sacked constables

    क्या है मामला
    कर्मचारी चयन आयोग द्वारा केंद्रीय बलों में कॉन्स्टेबलों की भर्ती की गई थी । इसके तहत कर्मचारी चयन आयोग केंद्रीय क्षेत्र इलाहाबाद द्वारा पिछले दिनों कुछ कॉन्स्टेबलों को बर्खास्त कर दिया गया था। इन कांस्टेबलों के अंगूठे के निशान व हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो पाया था। जिसके आधार पर इन की बर्खास्तगी का आदेश जारी हुआ था। आयोग ने बर्खास्तगी की कार्रवाई के साथ इन सभी कॉन्स्टेबलों के 3 साल चयन में शामिल ना हो पाने का भी आदेश दिया था । मामले को लेकर रणविजय सिंह आदि बर्खास्त कॉन्स्टेबलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली । जहां न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने मामले की सुनवाई शुरू की तो दलील दी गई कि आयोग ने बिना कोई पक्ष सुने एकतरफा कार्यवाही की है। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग के सभी आदेश को रद्द कर दिया है ।

    हाईकोर्ट ने क्या कहा
    इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से दी गई दलील के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि हस्ताक्षर और अंगूठे का मिलान नहीं होने पर अगर बर्खास्तगी हुई है तो आयोग की यह अभ्यर्थी को बताना चाहिये। आयोग ने किसी भी अभ्यर्थी को यह क्यों नहीं बताया? अगर हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान मेल नहीं खा रहा है तो कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए। अगर आयोग ने बर्खास्तगी का फैसला किया तो फिर अभ्यर्थियों को विशेषज्ञों की राय से अवगत कराया जाना चाहिए था और साथ ही उन्हे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। जब आयोग पहचान करने में असफल रहा और किसी को भी अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया तो यह एकतरफा कारवाई नैसर्गिक न्याय के विपरीत है। इसलिए आयोग आदेश रद्द किया जाने योग्य है।

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    English summary
    Allahabad High court nod for joining of sacked constables

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