Fact Check: क्या वाकई इन तस्वीरों का संबंध है विप्लव त्रिपाठी के काफिले पर हुए हमले से? जानिए सच्चाई

नई दिल्ली, 21 नवंबर। असम राइफल्स की कूगा बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विप्लव त्रिपाठी और उनका परिवार (बेटा और पत्नी) 13 नवंबर को आतंकियों के हमले में मारा गया था। आतंकियों ने चुराचांदपुर जिले में घात लगाकर विप्लव के काफिले पर हमला किया था। ये हमला हाल के दिनों में इस क्षेत्र में किए गए हमलों में सबसे बड़ा अटैक था। शहीद विप्लव और उनके परिवार का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर में हो गया है, लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों बहुत वायरल हो रही हैं, जिनको लेकर ये दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें विप्लव पर हुए आतंकी हमले के बाद की हैं।

क्या है उन दोनों तस्वीरों में?

क्या है उन दोनों तस्वीरों में?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों को कई केंद्रीय मंत्रियों, विधायकों समेत कई वेरिफाई फेसबुक अकाउंट्स से शेयर किया जा रहा है। आपको बता दें कि वायरल हो रही पहली तस्वीर में सेना के जवानों को किसी पहाड़ी इलाके में देखा जा सकता है। इस फोटो में एक आर्मी का ट्रक जला हुआ दिख रहा है। वहीं दूसरी फोटो कर्नल विप्लव त्रिपाठी की फैमिली फोटो के साथ जोड़कर शेयर की जा रही है। दूसरी फोटो में सेना के जवान सड़क से पेड़ को हटाते दिख रहे हैं। इन दोनों तस्वीरों को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें विप्लव त्रिपाठी के काफिले पर हुए हमले के बाद की हैं।

क्या है इन तस्वीरों की सच्चाई?

क्या है इन तस्वीरों की सच्चाई?

- इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम ने जब इन दोनों तस्वीरों की पड़ताल की तो पता चला कि ये तस्वीरें विप्लव त्रिपाठी पर हुए हमले की नहीं हैं। इनमें पहली तस्वीर जो है, वो 2015 में मणिपुर के चंदेल जिले में हुए एक आतंकी हमले की है। इस हमले में हमारे 18 जवान शहीद हो गए थे और 11 घायल हुए थे। यहां भी आतंकियों ने घात लगाकर सेना के काफिले पर हमला किया था।

- वहीं दूसरी फोटो न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की है। इस फोटो का इस्तेमाल 2014 से ही उग्रवादी हमलों की खबरों में फाइल फोटो की तरह इस्तेमाल की जाती है, लेकिन वो तस्वीर 2014 की ही है, जब असम और नागालैंड के गांवों के बीच क्षेत्रीय विवाद के चलते हिंसा हुई थी। रॉयटर्स ने इस तस्वीर को शेयर किया था। साथ ही फोटो के साथ लिखा था, "भारतीय सेना के जवान सड़कों पर पड़े पेड़ को हटाते हुए, जो असम की गोलाघाट में हुई हिंसा के बाद सड़क को जाम करने के लिए डाल दिए गए थे।" कई मीडिया संस्थानों ने इस तस्वीर का इस्तेमाल खबर में किया था।

फोटों को लेकर किया जा रहा है गलत दावा

फोटों को लेकर किया जा रहा है गलत दावा

अब ये साफ हो गया है कि जिन दोनों तस्वीरों को विप्लव त्रिपाठी पर हुए हमले से जोड़ा जा रहा है, वास्तव में वो दूसरे हमलों की हैं। ये तस्वीरें हाल ही में मणिपुर में हुए हमले की नहीं हैं।

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