Fact Check: पोप फ्रांसिस ने बाइबिल को बदलने की नहीं कही कोई बात, सोशल मीडिया पर फर्जी किया जा रहा है दावा
नई दिल्ली, दिसंबर 29। हाल ही में दुनियाभर में क्रिसमस का त्यौहार कोरोना के खतरे के बीच बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया है। इस क्रिसमस के मौके पर पोप फ्रांसिस का कथित रूप से एक बयान बहुत वायरल हुआ है। सोशल मीडिया पर पोप के बयान के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पोप फ्रांसिस ने बाइबिल को पुरानी किताब कहा है और उसकी जगह एक नई किताब को लाने का ऐलान किया है।

वायरल न्यूज आर्टिकल का स्क्रीनशॉट में कहा गया है कि पोप फ्रांसिस ने बाइबिल को पुराना बताया है और फैसला किया है कि इसके स्थान पर नई किताब 'बिब्लिया 2000' लाई जाए। इस आर्टिकल की हेडलाइन में लिखा है कि 'पोप फ्रांसिस ने द बाइबिल को रद्द किया और नई किताब का प्रस्ताव रखा।'

आर्टिकल में आगे लिखा गया है कि 'पोप फ्रांसिस ने आज यह घोषणा करते हुए दुनिया को चौंका दिया है कि बाइबिल पूरी तरह से पुरानी हो चुकी है और इसमें आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है, इसलिए बाइबिल को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है और उन्होंने चर्च की सर्वोच्च हस्तियों के बीच एक बैठक की घोषणा की जहां यह तय किया जाएगा कि कौन सी किताब इसकी जगह लाई जाएगी, उसका नाम और उसका कंटेंट क्या होगा। कुछ नामों पर पहले से ही विचार किया जा रहा है और जिसका अनुमान सबसे अधिक है वह है "बिब्लिया 2000।'पोप फ्रांसिस ने नहीं किया ऐसा कोई दावा
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने इस दावे की पड़ताल की है और पाया है कि यह दावा एकदम झूठा है। यह स्क्रीनशॉट एक व्यंग्य साइट द्वारा प्रकाशित 2018 के लेख का है। पोप फ्रांसिस के इस तरह के बयान देने के बारे में कोई विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट नहीं है। आपको बता दें कि पोप फ्रांसिस अपनी सुधार नीतियों और विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस साल अक्टूबर में, उन्होंने दो साल की प्रक्रिया भी शुरू की जो कैथोलिक चर्च की भविष्य की दिशा में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेगी।

Fact Check
दावा
Viral claimed is false
नतीजा
Viral claimed is false












Click it and Unblock the Notifications