Fact Check: कोरोना में 'आयुष 64' फार्मूले के फेल होने का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्ट भ्रामक
Fact Check: कोरोना में 'आयुष 64' फार्मूले के फेल होने का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्ट भ्रामक
नई दिल्ली, 31 अगस्त: कोरोना महामारी के आने के बाद इसको लेकर कई तरह की नई रिसर्च लगातार आ रही हैं। ऐसे में हर रोज इस बीमारी को लेकर कोई ना कोई नया दावा सामने आ जाता है। खासतौर से मोबाइल और इंटरनेट के जरिए कोरोना को लेकर कई तरह के मैसेज आजकल मिल रहे हैं। इसमें कई बार भ्रामक बातें भी चल रही हैं। ऐसे ही एक अखबार की खबर का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कहा गया है कि आयुष-64 दवा कोरोना महामारी में सफल नहीं रही है। इस रिपोर्ट को पीआईबी ने गलत कहा है।

सरकारी संस्था पीआईबी के फैक्ट चैक ट्विटर अकाउंट से किए ट्वीट में कहा गया है- कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आयुष-64 कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ फायदेमंद साबित नहीं हुआ है। यह दावा भ्रामक है। रिपोर्ट इस स्टडी को गलत तरह से पेश करता है। ये पाया गया है कि हल्के और मध्यम कोरोना संक्रमण में मरीज की देखभाल में आयुष-64 प्रभावी है। इस फार्मूले की प्रभावकारिता क्लीनिकल ट्रायल में भी साबित हुई है। ऐसे में ये दावा पूरी तरह से ठीक नहीं है।
सरकार ने इस पर क्या कहा था?
बता दें कि इस साल मई में चिकित्सा, स्वास्थ्य व आयुर्वेद मंत्री डॉ रघु शर्मा ने आयुष-64 को लेकर कहा था कि देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों का मानना है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फार्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार के सहयोग में लाभकारी है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बीच आयुष 64 दवा हल्के और मध्यम कोविड संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण है। उन्होंने बताया था कि आयुष मंत्रालय और सीएसआईआर ने हल्के से मध्यम कोरोना संक्रमण में आयुष 64 की प्रभावकारिता और इसके सुरक्षित होने का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक और गहन क्लीनिकल परीक्षण किया है।

Fact Check
दावा
आयुष 64 फार्मूला कोविड में लाभकारी नहीं है.
नतीजा
मीडिया रिपोर्ट में सच्चाई नहीं, गलत तरह से पेश किया गया आंकड़ा












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