Fact Check: उस हाथी ने नहीं बचाया हैदराबाद वाला जंगल, जिसका JCB से लड़ने का VIDEO हो रहा वायरल
Fact Check Hyderabad Forest: हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से लगते करीब 400 एकड़ वन क्षेत्र को लेकर चल रहे विवाद ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। इसी दौरान कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें हाथियों को बुलडोज़रों से टकराते और ज़ख्मी होते दिखाया गया है। लेकिन जब इन वायरल क्लिप्स की जांच की गई, तो पता चला कि इनका कंचा गाचीबोवली से कोई संबंध नहीं है।

सबसे पहले वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावे जानिए
एक नंबर वायरल वीडियो में एक हाथी की सूंड के ऊपर, आँखों के बीच गहरा ज़ख्म दिखाई देता है। दावा किया गया कि यह घाव गाचीबोवली में बुलडोज़र से हुआ। दो नंबर वायरल वीडियो में एक हाथी को बुलडोज़र से टकराते हुए दिखाया गया। दावा किया गया कि यह घटना हैदराबाद की है। तीन नंबर वीडियो में एक गिरे हुए हाथी को उठाने की कोशिश करती बुलडोज़र दिखाई देती है। इसे गलत तरीके से पेश करते हुए दावा किया गया कि यह हैदराबाद की घटना है और प्रशासन क्रूरता कर रहा है।
कैसे सामने आई हकीकत?
हैदराबाद के कंचा गाचीबोवली में चल रहे जंगल बचाने के नाम हाथी के वायरल वीडियो की हकीकत जानने के लिए हमने सोशल मीडिया प्लेटफार्म खंगाले, गूगल रिवर्स इमेज सर्च टूल का इस्तेमाल किया और मीडिया रिपोर्ट्स का सहारा लिया। तब इस वीडियो के बारे में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है।
एक नंबर वीडियो की हकीकत. "घाव" नहीं, जन्मजात स्थिति
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नंबर एक वीडियो की सच्चाई यह है कि यह वीडियो भारत का है ही नहीं। वीडियो दक्षिण अफ्रीका के क्रूगर नेशनल पार्क की मादा हाथी 'रांझेकीले' का है, जो एक जन्मजात गड्ढे के साथ पैदा हुई थी। उसकी हालत स्थिर थी और वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म भी दे चुकी थी।
दो नंबर वीडियो की हकीकत हाथी vs बुलडोज़र: बंगाल का मामला
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नंबर दो वीडियो की हकीकत यह है कि वीडिया एक फरवरी को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले का है। रिपोर्ट्स के अनुसार एक व्यक्ति ने जंगली हाथी को बुलडोज़र से डराने की कोशिश की थी, जिससे हाथी भड़क गया और उसने बुलडोज़र को उठा लिया। इस घटना में आरोपी को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था।
तीन नंबर वीडियो की हकीकत: मदद को बताया गया क्रूरता
दरअसल, यह वीडियो 2018 का है और श्रीलंका के होरोपोथाना इलाके का है। घायल हाथी की मदद के लिए वन विभाग के अधिकारी उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे ताकि उसका इलाज किया जा सके। दुर्भाग्यवश, हाथी को बचाया नहीं जा सका।
कंचा गाचीबोवली विवाद: जंगल, जमीन और न्याय की जंग
हैदराबाद के गाचीबोवली इलाके में फैले कंचा गाचीबोवली जंगल को लेकर छिड़ा विवाद फिर सुर्खियों में है। यह मुद्दा केवल ज़मीन का नहीं, बल्कि पर्यावरण, जीवविविधता और क़ानूनी अधिकारों का भी है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद दशकों पुराना है। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) का दावा है कि 400 एकड़ जंगल की यह ज़मीन उसे 1975 में आवंटित 2,324 एकड़ ज़मीन का हिस्सा है।
लेकिन 2022 में तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि इस दावे का कोई वैध दस्तावेज़ मौजूद नहीं है, जिससे यह ज़मीन यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित मानी जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा और स्पष्ट किया कि यह ज़मीन सरकारी है।
पर्यावरणविदों और छात्रों की चिंता
हालांकि कानूनी निर्णय ज़मीन पर सरकार का हक़ तय करता है, पर HCU के छात्र, स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता इस क्षेत्र को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील बताते हैं। यह क्षेत्र 455 से अधिक वनस्पति और जीव प्रजातियों का घर है - जिनमें मोर, भैंस झीलें, मशरूम जैसी चट्टानें और दुर्लभ पक्षी शामिल हैं। रियल एस्टेट के नाम पर पेड़ों की कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान हो सकता है।
राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की मांग
एक गैर-सरकारी संगठन ने इस भूमि को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने के लिए याचिका दाखिल की है। उनकी मांगें है कि इस क्षेत्र को 'मान्य वन' (Deemed Forest) का दर्जा दिया जाए। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। यहां किसी भी प्रकार की वाणिज्यिक गतिविधि पर रोक लगाई जाए।

Fact Check
दावा
हैदराबाद में जंगल बचाने के लिए हाथी जेसीबी से लड़ गया।
नतीजा
हाथी का वीडियो हैदराबाद का नहीं है।












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