Fact Check: क्या 'आइवरमेक्टिन' को मिल चुका है नोबल पुरस्कार? बताया जा रहा कोरोना की दवा
नई दिल्ली, 15 सितंबर। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ दुनियाभर में टीकाकरण अभियान जारी है। इस बीच कई देशों के वैज्ञानिक वायरस के खिलाफ दवा तैयार करने में जुटे हुए हैं लेकिन अभी तक किसी के हाथ सफलता नहीं लगी है। इस बीच कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर होने का दावा किए जाने वाली दवा आइवरमेक्टिन को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रह है कि 'मर्क एंड कंपनी' द्वारा निर्मित आइवरमेक्टिन ने नोबल पुरस्कार जीत लिया है।

आपको बता दें कि महीने के पहले सप्ताह में अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने कोविड के इलाज में आइवरमेक्टिन के इस्तेमाल पर सख्त चेतावनी जारी करते हुए इसके इस्तेमाल पर 'तत्काल रोक' करने की बात कही थी। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दवा को इंसानों और जानवरों के लिए सिर्फ आंतरिक और बाहरी परजीवियों के कारण होने वाले संक्रमणों के इलाज के लिए आइवरमेक्टिन के उपयोग को मंजूरी दी है, ना कि कोविड -19 के लिए। इसके बावदूद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आइवरमेक्टिन कोरोना वायरस के खिलाफ उचित हथियार है।
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इंटरनेट पर दवा को उपयोग वैध बनाने के प्रयास में हाई-प्रोफाइल पुरस्कार का हवाला दिया जा रहा है। 6 सितंबर को शेयर किए गए एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया गया कि इस दवा को साल 2015 में मानव रोग के इलाज के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि यह पूरी तरह सच नहीं है। दावे के लेकर की गई पड़ताल में पाया गया कि आइवरमेक्टिन जिसे एवरमेक्टिन के रूप में जाना जाता है, दवा के खोजकर्ताओं ने फिजियोलॉजी और मेडिसिन के क्षेत्र में साल 2015 का 2015 का नोबेल पुरस्कार जीता था। हालांकि यह पुरस्कार परजीवियों के उपचार से संबंधित खोज के लिए दिया गया था, ना कि कोरोना वायरस जैसी किसी संक्रमण के इलाज के लिए।

Fact Check
दावा
आइवरमेक्टिन को संक्रमण के इलाज के लिए मिल चुका है नोबल पुरस्कार।
नतीजा
संक्रमण के लिए नहीं परजीवियों के उपचार के लिए मिला था नोबल पुरस्कार।












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