पश्चिमी एशियाः अपाहिज होने को अभिशप्त

रफ़ा में तीन भाइयों की मौत का समाचार आया। खान यूनिस शहर में इस्लामिक जेहाद के चार सदस्य और एक बच्चे की मौत हो गई. दीर-अल-बला में फ़लस्तीनी नागरिक घायल हो गए और कुछ घर और इमारतें नष्ट हो गईं। इस बीच इसराइली लड़ाकू विमानों ने मिस्र और ग़ज़ा को जोड़ने वाली सुरंगों पर हमला किया। इसराइली जल सेना ने ग़ज़ा के बंदरग़ाह और ख़ुफ़िया संस्था की इमारत पर हमला किया।
इस तरह हमले हर दिन बढ़ते रहे और गज़ा शहर में हुए एक हवाई हमले में गृह मंत्रालय और तेल-अल-हवा स्थित इस्लामिक विश्वविद्यालय गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इस्राइली सेना ने हमास नेता इस्माइल हानिया के घर को निशाना बनाते हुए हमले हुए जिसमें शाती शरणार्थी शिविर को नुकसान पहुँचा। अश्केलो में हुए एक रॉकेट हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कुछ लोग घायल हुए.
31 दिसंबर, 2008 को जब दुनिया नए साल का जश्न मन रही थी तब ग़ज़ा शहर में पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया के दफ़्तर और हमास की दूसरी इमारतों पर हमला किया गया और इसराइली लड़ाकू विमानों ने मिस्र के साथ वाली सीमा पर स्थित सुरंगों पर हमले जारी रखे। 1 जनवरी, 2009 को ग़ज़ा शहर में न्याय मंत्रालय, विधानसभा, नागरिक रक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय की इमारतों के अलावा दो मुद्रा परिवर्तक दफ़्तरों और एक वर्कशॉप पर भी हमला किया गया। जबलिया में हुए एक हवाई हमले में नौ अन्य लोगों समेत एक वरिष्ठ हमास नेता निज़ार रयान की मौत हो गई। 4 जनवरी की देर रात तक ग़ज़ा के काफ़ी अंदर तक इसराइली सैनिक पहुँच चुके थे। ग़ज़ा उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में बंट गया था। दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाने वाले रास्तों को भी इसराइली सेना ने ध्वस्त कर दिया ताकि उस तरफ लोग भागकर न जा सकें.
ताज़ा जानकारियों के मुताबिक इसराइली सेना ने इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बाँट दिया है। विश्व समुदाय का दबाव इसराइली पर बेअसर लग रहा है। यूरोपीय संघ के एक उच्चस्तरीय दल और फ्रांस के राष्ट्रपति सार्कोज़ी इसराइल जाने वाले हैं ताकि शांति प्रयासों को बल मिल सके।
इजरायली हमले झेल रहे हमास ने कहा है कि वह इज़रायली सेना के सामने आत्म समर्पण नहीं करेगा। हमले में भारी संख्या में मारे जा रहे फिलिस्तीनी नागरिकों का हौसला बढ़ाने के लिए हमास के वरिष्ठ राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया ने कहा कि गाजा जमीनी हमले कर रही इजरायली सेना के सामने हथियार नहीं डालेगा। हानिया ने यह भा कहा कि गाजा पट्टी पर जमीनी कार्रवाई इस बात का सबूत है कि इजरायल यहां के बाशिंदों को आत्मसमर्पण के लिए बाध्य करने में नाकाम रहा है। हानिया ने माना कि गाजा के लोगों के पास टैंक और दूसरे हथियारों की कमी भले ही हो लेकिन उनके पास हौसला, इच्छाशक्ति, संयम और विपरीत परिस्थितियों में जीने का माद्दा है।
हमास और इस्राइल के बीच की लडाई का अंत चाहे जो निकले पर निर्दोष नागरिक इसका खामियाजा भुगत रहे हैं विश्व समुदये की चेतावनियों का कोई असर नही हो रहा है और युद्ध के नियम और मर्यादाएं ताक पर रखी जा चुकी है। साथ ही साथ इस्राइल के प्रति अरब देशों का गुस्सा भी बढ़ रहा है। ऐसे में पिछले 50 वर्षो से सुलगती गाजा पट्टी पर शान्ति कब आयेगी ये भविष्य के गर्भ में है
पर ये तो तय है की एशिया के पश्चिमी इलाके की संताने अपाहिज होने हो अभिशप्त रहेंगी।
(उत्कर्ष सिन्हा किसानों तथा ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को अपने देश के राजनीतिक और बाकी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक मंचों पर उठाते रहे हैं और दक्षिणी और पश्चिमी एशियाई मामलों के विशेषज्ञ हैं)












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