हर अधिकारी ऐसा क्यों नहीं...

हुआ यूं कि हरियाणा के सिरसा जिले में खबर आयी कि भारत सरकार के केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव श्री बीके सिन्हा अपने अन्य अधिकारियों के साथ सिरसा निरीक्षण के लिए पहुँच रहे हैं. उनके साथ पी राघवेंद्र राव, जोकि प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग के वितायुक्त एवं प्रधान हैं, भी पहुचे. फिर जैसा अकसर होता है. सारा प्रशासन आवभगत मे जुट गया, क्योकि इतने ऊँचे रैंक के अफसर की छोटे से शहर में पहला दौरा.
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हैरानी तो तब हुई जब आते ही अपने काम पर रवाना हो गए. आला अघिकारी ने कहा कि वे रात वहीं सरकारी स्कूल के परिसर मे ही बिताएगें. एक बार तो लगा कि यह तो हो नही सकता पर यह हुआ और उन्होंने गांव के लोगो से मिल कर गांव में हो रहे मनरेगा यानि महात्मा गाधीँ राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में गावों के विकास के कामों का जायजा लिया.
बिना बिजली, कूलर और एसी के भरी गर्मी में दिन रात घूमना किसी हैरानी से कम नही था. गांव के लोग भी उन्हें बडा अधिकारी ना समझ कर उनसे खुल कर अपनी परेशानिया बता रहे थे. उन्हे इस बात से कोई सरोकार नही था कि वो कितने बड़े अफसर हैं, बलिक इस बात से मतलब था कि वे इतने मन से उन्हीं के बीच बैठकर, उनके दुख और सुख के बारे मे बात कर रहे थे. इन अधिकारियो ने सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ वक्त बिताया और उनके विचार सुने.
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इसके साथ साथ वो अन्य गांव गोविंदपुरा और ओटू भी गए और मनरेगा व अन्य योजनाओ के बारे मे जानकारी ली. सर्वे करने के बाद जब उनसे बात की और जाना कि उन्हे कैसा लगा तो उन्होने बताया कि सही बात जानने के लिए लोगो के बीच मे जाकर उनके विचार जानने बहुत जरुरी होते है.गावँ के लोगो से मिलकर वो सभी अफसर बहुत खुश नजर आए.
कुल मिलाकर इन अधिकारियों ने अन्य के लिए मिसाल कायम की है। कम से कम उन अधिकारियों को इनसे प्रेरण व सबक लेना चाहिए जो सिर्फ दिन भर आराम कर कुर्सी तोड़ना चाहते हैं।












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