मुंबई हमले के मास्टर माइंड Tahawwur Rana के प्रत्यर्पण को बनाया संभव, क्या है उन 3 ऑफिसर की क्वालिफिकेशन?
IPS officers brought Tahawwur Rana to India: मुंबई हमलों के खूंखार गुनहगार तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाना सिर्फ एक कानूनी या कूटनीतिक सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा एजेंसियों के जज़्बे, समर्पण और पेशेवर मजबूती की मिसाल है। सालों से जारी प्रत्यर्पण की इस लड़ाई में हर कदम पर मुश्किलें थीं-कानून, विदेश नीति, सुरक्षा और तकनीकी पहलू-लेकिन इन सबके बीच तीन भारतीय आईपीएस अधिकारियों ने चुपचाप अपना काम किया और एक ऐसा ऑपरेशन सफल बनाया, जो आने वाले समय में एक मिसाल के तौर पर याद किया जाएगा।
ये तीनों अधिकारी न केवल अपने-अपने क्षेत्र के माहिर हैं, बल्कि उनकी पृष्ठभूमि भी बेहद दिलचस्प है-कोई इंजीनियरिंग छोड़कर आईपीएस बना, कोई डॉक्टर से अफसर बन गया, और कोई IIT से निकलकर देश की सुरक्षा का हिस्सा बना। आइए जानते हैं उन तीन जांबाज अफसरों की कहानी, जिनकी मेहनत और प्लानिंग से तहव्वुर राणा अब भारत की जमीन पर है।

आशीष बत्रा इंजीनियर से बने IPS
इस पूरे ऑपरेशन की अगुवाई की NIA के इंस्पेक्टर जनरल (IG) आशीष बत्रा ने। वे 1997 बैच के आईपीएस अफसर हैं और झारखंड कैडर से आते हैं। हरियाणा में जन्मे बत्रा ने इंजीनियरिंग करने के बाद UPSC की राह चुनी। उन्होंने नक्सल क्षेत्रों में कई ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं और 2018 में झारखंड जगुआर के IG भी रह चुके हैं। इस समय वे NIA में IG के पद पर तैनात हैं।
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MBBS से IPS बनीं जया रॉय
इस टीम की दूसरी खास सदस्य हैं आईपीएस जया रॉय। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली जया ने पहले मेडिकल की पढ़ाई की और फिर UPSC पास कर 2011 बैच में आईपीएस बनीं। वे झारखंड कैडर की अधिकारी हैं और 2019 से NIA में DIG के पद पर कार्यरत हैं। जया रॉय ने जामताड़ा में साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की अगुवाई भी की थी।
IITian प्रभात कुमार ने संभाला कोऑर्डिनेशन
इस ऑपरेशन के तीसरे अहम सदस्य हैं प्रभात कुमार, जो IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। बिहार से आने वाले प्रभात ने प्राइवेट सेक्टर में भी काम किया लेकिन देश सेवा के जज़्बे ने उन्हें सिविल सर्विस की ओर मोड़ा। 2018 बैच के आईपीएस प्रभात फिलहाल NIA में SP हैं और तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण ऑपरेशन के कोऑर्डिनेटर भी रहे।
तीनों अफसरों ने मिलकर दिखाया दम
NIA की इस ट्राईओ की मेहनत और प्लानिंग से ही तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाया जा सका। यह ऑपरेशन सिर्फ एक कानूनी या कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि उन अफसरों की जीत है जो हर परिस्थिति में देशहित को सर्वोपरि रखते हैं।
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