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Maharashtra medical admissions: एडमीशन के नियमों में किए गए ये बदलाव, किन छात्रों को लाभ किन्‍हें होगा नुकसान?

Maharashtra medical admissions: महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल द्वारा राज्य में मेडिकल ग्रेजुएशन(यूजी) पाठ्यक्रमों के एडमीशन शुरू कर दिया गया है। इस बार राज्‍य में मेडिकल में एडमीशन को लेकर कुछ नियमों में बदलाव किए गए हैं। जानिए नियमों में किए बदलाव से किन छात्र-छात्राओं को फायदा होगा और किनको होगा नुकसान?

महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CT) सेल द्वारा राज्य में मेडिकल स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा के साथ ही, एक सूचना विवरणिका में निजी मेडिकल कॉलेजों में 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण देने का प्रवाधान किया गया है। चूंकिसीटों की संख्या में वृद्धि किए बिना इस आरक्षण को लागू किया गया है इससे ओपेन सीटों की संख्या में भारी कमी आएगी।

Maharashtra medical admissions

इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने इस साल से NRI कैंडिडेट्स की परिभाषा को और सख्त कर दिया है। अब, केवल वे ही उम्मीदवार एनआरआई कोटे के तहत आवेदन कर सकते हैं जो स्वयं या जिनके माता-पिता एनआरआई हैं, या जिनका कानूनी अभिभावक एनआरआई है। पहले कोई भी एनआरआई परिवार का सदस्य शुल्क का प्रायोजन कर सकता था, लेकिन अब यह प्रथा बदल गई है।

10% सीट EWS के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित

बुधवार को जारी सूचना में संवैधानिक आरक्षण के तहत ईडब्ल्यूएस आरक्षण की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त/निगम/निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर) में, राज्य कोटे के तहत उपलब्ध सीटों में से 10% ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, कई लोगों ने इस पर चिंता जताई है कि इससे निजी मेडिकल कॉलेजों में खुली सीटों की संख्या में भारी कमी आएगी, क्योंकि कुल सीटों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

ओपेन सीटों की संख्या में काफी कमी आएगी

इंडियन एक्‍सप्रेस को दिए इंटरव्‍यू में एक अभिभावक ने कहा 2019 में जब सरकारी मेडिकल कॉलेजों (जीएमसी) में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया था, तो सभी को खुली सीटों में 10% आरक्षण समायोजित करने के लिए एक बार सीट वृद्धि की अनुमति दी गई थी, ताकि सामान्य श्रेणी के तहत उपलब्ध सीटों की संख्या पर कोई प्रभाव न पड़े।

उन्‍होंने आगे कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों में खुली सीटों के लिए उपलब्ध लगभग 3000 सीटों में से, लगभग 300 सीटों का उपयोग ईडब्ल्यूएस आरक्षण को समायोजित करने के लिए किया जाएगा, जिससे खुली ओपेन सीटों की संख्या में काफी कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को पहले से ही शुल्क लाभ मिल रहा है, तो फिर इस आरक्षण को शुरू करने की क्या आवश्यकता थी?

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