CBSE री-चेकिंग में बंटे छप्परफाड़ नंबर, किसी का स्कोर हुआ 500/500 तो कहीं बढ़ गए 21 नंबर, मचा बवाल
CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर उठे सवालों के बीच री-चेकिंग के नतीजों ने एक नई बहस छेड़ दी है। इस साल कई छात्रों के अंक दोबारा जांच के बाद इतने बढ़ गए कि अभिभावकों और शिक्षकों तक को हैरानी हो रही है। कहीं 19 नंबर बढ़े तो कहीं 21 अंकों का सीधा उछाल देखने को मिला। सबसे चौंकाने वाले मामलों में कुछ छात्रों का स्कोर 100 प्रतिशत तक पहुंच गया।
ऐसे नतीजों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पहली बार कॉपियों की जांच में इतनी बड़ी गलती कैसे हुई। लाखों छात्रों द्वारा स्कैन कॉपी, वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किए जाने के बाद अब CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया और OSM सिस्टम दोनों चर्चा के केंद्र में हैं।

अवनी केजरीवाल को मिले पूरे 500 अंक
रांची की छात्रा अवनी केजरीवाल का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के शुरुआती परिणाम में उन्हें 95.2 प्रतिशत अंक मिले थे। हालांकि अवनी को भरोसा था कि अंग्रेजी और बिजनेस स्टडीज में उनके अंक अपेक्षा से कम आए हैं। उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया। दोबारा जांच के बाद जब नया परिणाम जारी हुआ तो उनका कुल स्कोर 500 में से 500 हो गया।
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अंग्रेजी विषय में अवनी को पहले 81 अंक मिले थे, लेकिन री-चेकिंग के बाद यह बढ़कर सीधे 100 हो गए। भाषा विषय में 19 अंकों का इतना बड़ा अंतर लोगों के लिए हैरानी का विषय बन गया।
कुशल जैन के केमिस्ट्री में बढ़े 21 अंक
दिल्ली के छात्र कुशल जैन की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। उन्हें फिजिक्स और मैथ्स में 97-97 अंक मिले थे, लेकिन केमिस्ट्री में सिर्फ 79 अंक दिए गए। कुशल को लगा कि उनके प्रदर्शन के हिसाब से यह स्कोर सही नहीं है।
उन्होंने अपनी केमिस्ट्री की कॉपी दोबारा जांचने के लिए आवेदन किया। री-चेकिंग पूरी होने के बाद उनके अंक 79 से बढ़कर सीधे 100 हो गए। इस बदलाव के कारण उनका कुल प्रतिशत 91 से बढ़कर 98 प्रतिशत पहुंच गया। एक विषय में 21 अंकों की बढ़ोतरी ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे आवेदन
इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने परिणामों को लेकर पुनर्मूल्यांकन का रास्ता चुना। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी। वहीं 1.6 लाख से ज्यादा छात्रों ने वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया।
इतनी बड़ी संख्या यह दिखाती है कि छात्रों के बीच मूल्यांकन को लेकर चिंता और असंतोष दोनों मौजूद थे। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोग मानते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन अपने आप में एक बड़ा संकेत है।
OSM सिस्टम पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
CBSE ने हाल के वर्षों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM को लागू किया है। इस प्रणाली के तहत परीक्षक डिजिटल माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते हैं। हालांकि इस बार परिणाम आने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इस सिस्टम को लेकर शिकायतें कीं। कुछ लोगों ने तकनीकी दिक्कतों और मूल्यांकन में असंगति की बात कही। री-चेकिंग के बाद सामने आए बड़े बदलावों ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि दूसरी जांच में इतने बड़े अंतर सामने आ सकते हैं, तो पहली जांच के दौरान क्या कमियां रह गई थीं।
बोर्ड की प्रक्रिया पर नजर
री-इवैल्यूएशन की व्यवस्था छात्रों को संभावित गलतियों से राहत देने के लिए बनाई गई है और इस प्रक्रिया से कई छात्रों को फायदा भी मिला है। लेकिन जब एक ही उत्तर पुस्तिका में पहली और दूसरी जांच के बीच इतना बड़ा अंतर सामने आता है, तो मूल्यांकन प्रणाली की सटीकता को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
इसी वजह से अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया पर है। OSM सिस्टम को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बोर्ड से यह उम्मीद की जा रही है कि वह इन मामलों का अध्ययन करे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में छात्रों को उनकी मेहनत के अनुरूप सही अंक मिल सकें।
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