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Dhyan ke Niyam: आध्यात्मिक साधना के लिए क्या होना चाहिए नियम?

Dhyan ke Niyam: आजकल के दौड़भाग वाले जीवन में मनुष्य काफी परेशान है। वह सफलता प्राप्त करना चाहता है किंतु नहीं कर पा रहा है। सारी समस्याओं का मूल है अज्ञानता, अविद्या। और अज्ञानता, अविद्या दूर करने में आध्यात्मिक साधनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन यदि आप आध्यात्मिक साधनाओं के पथ पर चलना चाहते हैं तो किसी गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करें। स्वामी शिवानंदजी ने आध्यात्मिक पथ पर चलने वालों के लिए कुछ नियम बताए हैं।

Dhyan ke Niyam:
  • ब्रह्ममुहूर्त जागरण : प्रात: 4 बजे का समय ब्रह्ममुहुर्त होता है। चार बजे उठकर आध्यात्मिक साधनाओं का प्रारंभ करे।
  • आसन : पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन पर जप तथा ध्यान के लिए आधे घंटे के लिए पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • जप मंत्र : अपनी रुचि या प्रकृति के अनुसार किसी भी मंत्र ऊं, ऊं नमो नारायणाय, ऊं नम: शिवाय, ऊं नमो भगवते वासुदेवाय आदि का प्रतिदिन 1 माला से 200 माला तक करें।
  • आहार संयम : शुद्ध सात्विक आहार लीजिए। मिर्च, खटाई, लहसुन, प्याज, तेल, सरसों, हींग का त्याग कीजिए। वर्ष में एक बार एक पखवाड़े के लिए उस वस्तु का त्याग कीजिए जो आपको सबसे अधिक प्रिय हो।
  • ध्यान कक्ष : ध्यान कक्ष अलग होना चाहिए। जब आप कक्ष से बाहर हों तक उस पर ताला लगाकर रखिए।
  • दान : प्रतिमाह अथवा प्रतिदिन अपने साम‌र्थ्य के अनुसार दान दीजिए।
  • स्वाध्याय : गीता, रामायण, भागवत, विष्णुसहस्रनाम, उपनिषद आदि धर्म ग्रंथों का नित्य स्वाध्याय कीजिए।
  • ब्रह्मचर्य : बहुत ही सावधानीपूर्वक वीर्य की रक्षा कीजिए। वीर्य विभूति है।
  • स्तोत्र पाठ : प्रार्थना के कुछ श्लोकों अथवा स्तोत्रों को जप अथवा ध्यान आरंभ करने से पहले पाठ करें।
  • सत्संग : निरंतर सत्संग कीजिए। कुसंगति, धूम्रपान, मांस, शराब आदि का सेवन न करें।
  • व्रत : एकादशी का व्रत रखिए। उस दिन मात्र दूध अथवा फल पर रहें।
  • जपमाला : जपमाला को अपने गले में पहनिए अथवा जेब में रखिए। रात्रि में इसे तकिए के नीचे रखें।
  • मौनव्रत : नित्यप्रति कुछ घंटों के लिए मौन रहिए।
  • वाणी संयम : प्रत्येक परिस्थिति में सत्य बोलिए। कम बोलिए। मीठा बोलिए।
  • अपिरग्रह : अपनी आवश्यकतओं को कम कीजिए।
  • हिंसा परिहार : कभी भी किसी को चोट न पहुंचाइए। क्रोध को प्रेम तथा दया से नियंत्रित कीजिए।
  • आत्म निर्भरता : सेवकों पर निर्भर न रहिए। अपने काम स्वयं कीजिए।
  • आध्यात्मिक डायरी : रात्रि में सोने से पहले दिनभर की अपनी गलतियों पर विचार कीजिए।
  • कर्तव्य पालन : मृत्यु हर क्षण आपकी प्रतीक्षा कर रही है। अपने कर्तव्यों का पालन करने में न चूकिए।
  • ईश चिंतन : प्रात: उठने ही तथा रात्रि में सोने से पहले ईश्वर का चिंतन कीजिए।

डिप्रेशन को दूर करने का मंत्र

  • डिप्रेशन को दूर करने का मंत्र- ऊं ऐं ह्वीं क्लीं आंजनेयाय नमः। इस मंत्र को अंजनी मंत्र के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि इस मंत्र का जाप सात दिनों तक दिन में तीन बार किया जाता है। अगर आप लगातार इसका जाप करते हैं तो आपकी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं।
  • बुरी आदतों को छोड़ने का मंत्र- इसके अलावा बुरी आदतों को छोड़ने के लिए मंत्र का इस्तेमाल किया जाता है-ते वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनम् मारुतिं नमत रक्षसान्तकम्। ज्योतिषियों का कहना है कि अगर कोई सच्चे मन से इस मंत्र का इस्तेमाल करता है तो असर होता है।
  • संतान की भलाई का मंत्र- श्री कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। ज्योतिषियों का कहना है कि अगर आप एक मंत्र का जाप करें तो आपकी संतान सदा सुखी रहेगी।

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