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इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन में प्लास्टिक नहीं, GFRP सरियों का हो रहा इस्तेमाल, अफवाहों पर विभाग ने दी सफाई

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इंदौर-उज्जैन सिक्स-लेन परियोजना में प्लास्टिक की जगह ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर (GFRP) रेबार का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीएफआरपी (GFRP) हल्का, जंग-रोधी और टिकाऊ गुणों वाला होता है, जो IRC 137:2022 के अनुरूप है। यह तकनीक पुलों, सड़कों और समुद्री परियोजनाओं में तेजी से अपनाई जा रही है, जो आधुनिक निर्माण पद्धतियों को उजागर करती है।

निर्माणाधीन इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन मार्ग को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें आरसीसी ड्रेनेज निर्माण में "प्लास्टिक के सरिये" के उपयोग का दावा किया गया। हालांकि विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस दावे को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है।

GFRP Rebars Used on Indore-Ujjain Project

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य में प्लास्टिक नहीं, बल्कि ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर (GFRP) से बने आधुनिक सरियों का उपयोग किया जा रहा है। यह सामग्री उन्नत तकनीक के तहत प्रयोग में लाई जाती है और पारंपरिक स्टील की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और जंगरोधी मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, GFRP सरिये न केवल हल्के होते हैं, बल्कि इनमें जंग लगने की समस्या भी नहीं होती, जिससे इनकी उम्र अधिक होती है। यही कारण है कि आधुनिक निर्माण परियोजनाओं में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के कोड 137: 2022 के तहत सड़क निर्माण परियोजनाओं में GFRP सरियों के उपयोग को सुरक्षित और प्रमाणित माना गया है। इस कोड के अनुसार, इन सरियों का उपयोग निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है और इससे निर्माण की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

GFRP का पूरा नाम ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर है। यह एक आधुनिक निर्माण सामग्री है, जो पारंपरिक लोहे की सरियों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होती है। इसे कांच के फाइबर और पॉलिमर रेजिन से तैयार किया जाता है, इसलिए इसे फाइबर सरिया भी कहा जाता है।

यह सामग्री बिजली और चुंबकीय क्षेत्र का संचालन नहीं करती, जिससे यह कई विशेष परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बनती है। इसका उपयोग पुल और फ्लाईओवर, समुद्री क्षेत्रों, नमक प्रभावित इलाकों, पानी की टंकियों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सड़क और मेट्रो परियोजनाओं में व्यापक रूप से किया जाता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

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