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Vikram Samvat 2075: नए साल के राजा सूर्य, जानिए कैसा रहेगा आने वाला वर्ष

By Pt. Anuj K Shukla
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    लखनऊ। विक्रम संवत् का आरम्भ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इस बार विक्रमीय संवत् 2075 का नाम विरोधकृत संवत्सर है। इस संवत्सर का राजा सूर्य है और मन्त्री शनि है। सूर्य ग्रह मेघेश है, शुक्र रसेश विभाग है। धान्येश सूर्य है, बुध रसेश है, चन्द्र फलेश है, गुरू धनेश है, दुर्गेश यानि सुरक्षा का कारक गुरू ग्रह है।

    संवत्सर 2075 के राजा सूर्य का फल-

    • तीक्ष्णोर्कः स्वल्प-सस्यश्च गतमेघोति तस्करः।
    • बहूरग-व्याधिगणो भास्कराब्दो रणाकुलः।।
    अर्थात

    अर्थात

    सूर्य के संवत्सरेश होने से इस संवत् 2075 में कृषि एवं फलादि का उत्पादन कम होगा, समयानुसार वर्षा न होने से खड़ी फसलों को हानि होगी। नानाविधि असाध्य रोग, अग्निकाण्ड एवं घातक शस्त्रास्त्रों का उग्रवादियों द्वारा सर्वत ,सीमा प्रान्तों पर खुला प्रयोग हो। शासकों एवं आम जनता में मतभेद उजागर होंगे। ‘‘निधनं नृपणाम्'' अतः किसी विशिष्ट व्यक्ति विशेष के निधन से शोक होगा।

    शनि संवत्सर

    शनि संवत्सर

    • मन्त्री शनि का फल-शनि संवत्सर का मन्त्री होने के कारण अपने कर्तव्य एवं परम्परा की उपेक्षा करने वाले शासकों को जनता सबक सिखायेगी। भारत की वैश्विक स्तर पर ख्याति बढ़ेगी। अन्याय व अपराध करने वालों के लिए कठोर दण्ड के नियम बनेंगे।
    • सस्येश चन्द्र का फल-चन्द्र के सस्येश होने से कृषकों को, दुधारू पशुओं के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा।
    सूर्य के धान्येश होने से वर्षा कम होती है

    सूर्य के धान्येश होने से वर्षा कम होती है

    • धान्येश सूर्य का फल-सूर्य के धान्येश होने से वर्षा कम होती है, अनकेत्र दुर्भिक्ष की स्थिति भी बनने के योग है। मूॅग, दलहन, तिल आदि में तेजी बनी रहेगी।
    • धनेश चन्द्र का फल-धनेश चन्द्र होने से रस पदार्थो के स्टाॅक एवं पेय, मिठाई आदि के व्यापार से लाभ मिलेगा। वस्त्र, चावल, सुगन्धित, पदार्थ, घी, एवं तेल-तिलहन के व्यापार से व्यापारी लाभ पाते है। जनता कानूनों का सहर्ष पालन करते हुये समुचित करों का भुगतान करके देश की समृद्धि एंव मंगलकामना करती है।
    जनकल्याणार्थ शासक नीति निर्धारित करेंगे

    जनकल्याणार्थ शासक नीति निर्धारित करेंगे

    • मेघेश शुक्र का फल-वर्षा सुखद एवं पर्याप्त हो, फसल एवं सभी कृषि-कर्म से प्राप्त उत्पादन अच्छा होने से राजकोष में वृद्धि हो एवं जनकल्याणार्थ शासक नीति निर्धारित करेंगे।
    • निष्कर्ष-संवत् के इन पदाधिकारियों का फल सर्वत्र अनुभव में पाया जाता है। राजा सूर्य होने से कशमीर व अफगानिस्तान, ईरान, अमेरिका पर राजा का विशेष ध्यान आकृष्ट रहेगा। मन्त्र शनि का प्रभाव आन्ध्रप्रदेश, उज्जैन, मलावा आदि क्षेत्रोें में विशेष रहेगा। धान्येश सूर्य का प्रभाव गुजरात, नर्मदा के तटवर्ती प्रदेश एवं मध्य प्रदेश आदि में रहेगा। मेघेश का असर मगध एवं बंगाल में, रसेश का प्रभाव कोंकण, गोवा में, नीरसेश का असर मलावा व बिहार में, धनेश का राजस्थान एवं बाड़मेर में, एवं राजा का फल सब जगह विशेष होता है।

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    English summary
    Vikram Nav Varsh Samvant in the traditional lunar Hindu calendars followed in North India.

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