घर का मेनडोर बता देता है कि मालिक किस मिजाज का है...
नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में मकान के निर्माण के प्रत्येक चरण का सूक्ष्म अध्ययन करना जरूरी समझा जाता है। इसकी वजह यह है कि मकान के छोटे से छोटे हिस्से के निर्माण का असर उसमें रहने वाले व्यक्तियों पर पड़ता है। यह असर इतना सूक्ष्म होता है कि इसे एक विशेषज्ञ ही पहचान सकता है और इतना गहरा होता है कि घर में रहने वाले हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है।
मकान के प्रवेशद्वार का असर घर के मालिक पर होता है
आज हम बात कर रहे हैं मकान के प्रवेशद्वार की और घर के मालिक पर उसके पड़ने वाले प्रभाव की। देखने में यह एक साधारण सी बात लगती है कि एक घर बनवाया और जहां वेंटीलेशन सही लगा, उसके अनुरूप दरवाजे, खिड़की की स्थिति तय कर दी गई, पर वास्तव में ऐसा है नहीं।
वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान के प्रवेशद्वार की स्थिति दिशाओं का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद ही तय करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि मकान के प्रवेशद्वार की दशा मकान मालिक की मानसिक स्थिति पर असर डालती है। मकान के प्रवेशद्वार पर जिस ग्रह का प्रभाव होता है, उसी के अनुरूप मकान मालिक का स्वभाव होता है।
आइए, देखते हैं क्या और कैसा असर होता है मकान के प्रवेशद्वार का-

क्या और कैसा असर होता है मकान के प्रवेशद्वार का
- मकान का प्रवेशद्वार यदि पूर्व दिशा में हो, तो मकान का मालिक महत्वाकांक्षी स्वभाव का होता है।
- पूर्व दिशा का स्वामी सूर्य होता है और उसके गुणों के अनुरूप ही मकान मालिक का स्वभाव होता है।
- ऐसे मकान का मालिक सतोगुणी और साहसी होता है। करेला, तुरई, मैथी जैसी सब्जियां खाने में उसकी रुचि होती है।
- जिस मकान का प्रवेशद्वार आग्नेय दिशा में हो, उस पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है।
- शुक्र के प्रभाव के परिणाम स्वरूप मकान के मालिक का स्वभाव भी रंगीला, शौकीन और विलासी होता है।
- ऐसा व्यक्ति सिनेमा, नाटक, चित्रकला आदि का शौक रखता है।
- उसे खाने पीने और मौज मजे में दिलचस्पी होती है।
- नए वस्त्रों और सुगंधित द्रव्यों को ऐसे व्यक्ति विशेष रूप से पसंद करते हैं।
- खाने पीने में इन्हें खट्टी- मीठी और बढि़या चीजें ही पसंद आती हैं।
- दक्षिण दिशा में मकान का प्रवेशद्वार होने पर मकान मालिक पर इस दिशा के स्वामी मंगल का प्रभाव रहता है।
- मंगल के अनुरूप ही गृहस्वामी साहसी, घमंडी, गुस्सैल और हठी होता है।
- उसे चटपटी और स्वादिष्ट चीजें खाना पसंद रहता है।
- नैऋत्य दिशा में मकान का प्रवेशद्वार हो तो वह राहु के प्रभाव में होता है।
- राहु के गुण धर्मों के अनुरूप इस मकान का स्वामी तामसी, कामुक, गैर कानूनी काम करने वाला होता है।
- वह तंत्र-मंत्र, गूढ़शास्त्रों में विशेष रुचि रखता है। खाने में उसे बासी वस्तुएं अधिक पसंद आती हैं।
- मकान का द्वार पश्चिम में हो तो वह दिशा स्वामी शनि के अधीन रहता है।
- शनि के स्वभाव के अनुरूप गृहस्वामी गंभीर, विचारवान, सहनशील, जिम्मेदारी
- बंटानेवाला होता है। उसे तेल से बनी और ठंडी चीजें विशेष पसंद रहती हैं।
- वायव्य दिशा में मकान का प्रवेशद्वार गृहस्वामी को चंद्र के अधीन रखता है।
- चंद्र के कारण ऐसे मकान के मालिक अस्थिर, चंचल, भावुक, यात्रा के शौकीन और
- मृदुभाषी होते हैं। अच्छी सब्जियां खाने के शौकीन होते हैं और ये खाने में नमक अधिक लेते हैं।
- उत्तर दिशा का स्वामी बुध को माना जाता है। यदि मकान का प्रवेशद्वार उत्तर में हो, तो मकान मालिक बुद्धिमान, हंसी- मजाक करने वाला, साहित्यकार
- होता है। ऐसा व्यक्ति हर काम में फुर्तीला होता है। वह सभी तरह के आहार पर्याप्त मात्रा में लेता है।
- ईशान्य दिशा में मकान का प्रवेशद्वार होने पर गृहस्वामी बृहस्पति के अनुकूल होता है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक, परोपकारी, विषयों की गहरी जानकारी रखने वाला,
- बहुभाषी और स्वभाव से मस्तमौला होता है। ऐसे व्यक्ति मिठाई के विशेष शौकीन होते हैं।
- इस विस्तृत विश्लेषण के बाद आप समझ ही गए होंगे कि किसी भी मकान का वास्तु घर में रहने वाले सदस्यों को किस तरह और कितने गहरे तौर पर प्रभावित
- करता है। तो अब अपने मकान का प्रवेशद्वार बनवाने से पहले एक बार उसकी दिशा पर ध्यान अवश्य दें।

नए वस्त्रों और सुगंधित द्रव्यों

मकान का प्रवेशद्वार

गृहस्वामी गंभीर, विचारवान, सहनशील, जिम्मेदारी













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